ईश्वर भी संजीवनी कैसे बनते, वहां तो संदीप की सांसें पहले ही टूट चुकी थीं। स्वजन पहुंचे तो उन्हें संदीप का शव ही नसीब हुआ। मां, पिता, भाई सबकी उम्मीदें टूट गईं। दरअसल, संदीप के स्वजन को लेकर ग्राम प्रधान प्रयागराज रवाना हुए, तो सूचना उनके अस्पताल में भर्ती होने की ही थी। इसीलिए स्वजन ईश्वर से उनके सकुशल होने की मनुहार लगाते पहुंचे थे। आरक्षी संदीप एक साल से विधायक राजू पाल की हत्या में गवाह रहे उमेश पाल की सुरक्षा में लगे थे, जिन्हें बचाने में गत शुक्रवार को जान गंवानी पड़ गई।
स्वजन बोले साथ मनानी थी होली, अधूरा रह गया सपना
संदीप एक माह पूर्व अपने घर आए थे। पत्नी रीमा की तबीयत खराब देख उसे अपने साथ प्रयागराज ले गए। पिता संतराम, माता समुंदरी देवी को भरोसा दिया कि अबकी होली गांव पर मनेगी। फरीदाबाद की प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहे बड़े भाई बड़े भाई प्रदीप ने भी होली पर लौटने की बात कही थी। छोटे भाई दीपचंद निषाद फोन पर यह जानकारी देते हुए बिलख उठते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है।
दहल गए शक्ति सिंह, मुश्किल से खुद को संभाला
विसईपुर के ग्राम प्रधान शक्ति सिंह के मोबाइल पर शाम सात बजे सूचना मिली तो दहल उठे। उन्होंने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला फिर संदीप के गंभीर बीमार होने की सूचना दिए, और उन्हें अपने साथ लिवा गए। उन्हें प्रयागराज पहुंचने तक आशंका से घिरे स्वजन दर्जनोें सवाल किए, जिसका समाना करते, उन्हें संभालते सभी के साथ रात 11 बजे वहां तक जा पहुंचे।
विसईपुर गांव में सन्नाटा पसरा पड़ा है। घर में भाभी दो बच्चों के साथ अकेली हैं। पास-पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभालने में लगीं थीं। असल में देर रात संदीप के निधन की सूचना आजमगढ़ पहुंच चुकी थी। उसके बाद से रोना-बिलखना शनिवार को भी बदस्तूर रहा। खुश मिजाज संदीप को पास-पड़ोस के लोग भी भूल नहीं पा रहे थे। संदीप की अभी सवा दो साल पहले ही दीदारगंज थाने के लसड़ाखुर्द गांव की रीमा से शादी हुई थी। उन्हें कोई बच्चा नहीं है। परिवार में संदीप के मां-पिता, छोटे भाई, भाभी व उनके दो बच्चे रहते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है।