शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं
हार्ट, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग में रामबाण
नई दिल्ली । शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। यह औषधि हृदय रोगियों के लिए वरदान मानी जाती है। यह एक नहीं बल्कि अनेक बीमारियों को शरीर से छूमंतर कर देती है। शालपर्णी बवासीर, कब्ज, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग जैसी तमाम बीमारियों में बहुत उपयोगी और फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार यह औषधि बेहद महत्वपूर्ण और गुणकारी है। यह बवासीर, कब्ज, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग जैसी तमाम समस्याओं में उपयोगी है। विशेषज्ञ की मानें तो शालपर्णी का आयुर्वेद में बहुत सारी बीमारियों में वर्णन आया है। सबसे खास फोकस इसका आयुर्वेद में चरक ने हृदय रोग के लिए किया है। चरक ने कहा है कि अगर किसी को हृदय रोग है। शालपर्णी का पाउडर बना लें।
दूध के साथ मिलाकर उसका सेवन करें। इसके अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल और शुगर में भी यह उपयोगी है। अगर किसी को जोड़़ों में दर्द होने की समस्या है तो उसे शालपर्णी के चूर्ण को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। अगर किसी को डैंड्रफ की समस्या है तो इसके जड़ को पाउडर बनाकर दही में मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाना चाहिए। अगर किसी को चर्म से संबंधित समस्या है तो उसमें भी शालपर्णी बहुत उपयोगी है। यह कब्ज और बवासीर में उत्पन्न तमाम समस्याओं में उपयोगी है। हर जड़ी बूटी के लाभ हैं तो उसके नुकसान भी होते हैं। इसलिए बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक से राय लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए।
खासतौर से महिलाओं और जो शुगर और हार्ट के मरीज हैं, जिनकी कोई पुरानी दवा चल रही हो, वह आयुर्वेदि चिकित्सक से सलाह लेकर तभी इसका प्रयोग करें। बता दें कि इस धरती पर कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिनका बड़ा औषधीय महत्व है। यह शरीर से बीमारी को दूर करने में औषधि का काम करते हैं। इनमें से एक औषधि है शालीपर्णी। इसका आयुर्वेद में खुद चरक ने वर्णन किया है।
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शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं
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सेहत के लिए अंडा ज्यादा बेहतर होता है या दूध?
आज जानने की कोशिश करेंगे कि सेहत के लिए अंडा ज्यादा बेहतर होता है या दूध? दोनों चीजों में से किस में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक उबले हुए अंडे में करीब 6.3 ग्राम प्रोटीन, 77 कैलोरी, 5.3 ग्राम टोटल फैट, 212 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल, 0.6 ग्राम कार्ब्स, 25 मिलीग्राम कैल्शियम, समेत विटामिन ए, विटामिन बी2, विटामिन बी12, विटामिन बी5, फॉस्फोरस, सेलेनियम समेत तमाम पोषक तत्व होते हैं।
खास बात यह है कि इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है, लेकिन यह ब्लड कोलेस्ट्रॉल पर कम असर करता है और हार्ट डिजीज को जोखिम नहीं बढ़ाता है। हालांकि जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, वे अंडा खाने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से कंसल्ट कर सकते हैं। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक एक कप में करीब 250 ग्राम दूध होता है। इसमें 8.14 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन, 152 कैलोरी, 12 ग्राम कार्ब्स, 12 ग्राम शुगर, 8 ग्राम फैट, 250 मिलीग्राम कैल्शियम, विटामिन बी12, राइवोफ्लेविन, फॉस्फोरस समेत तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं। दूध में 88 प्रतिशत पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।
दूध में कुछ मात्रा में व्हे प्रोटीन भी पाया जाता है। दूध को प्रोटीन के साथ कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स माना जाता है। खास बात यह है कि दूध से मिलने वाला कैल्शियम शरीर में आसानी से अब्जॉर्ब हो जाता है।अगर दूध और अंडा की न्यूट्रिशिनल वैल्यू की बात करें, तो दोनों ही चीजों में अच्छी मात्रा में प्रोटीन होता है। दूध में अंडा की अपेक्षा कैल्शियम ज्यादा होता है। साथ ही अंडा में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है, जबकि दूध में ऐसा नहीं होता है। दोनों ही चीजों में कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती है और इनका सेवन करना सुरक्षित माना जाता है। कुल मिलाकर अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो दूध का जमकर सेवन करें। अगर आप अंडा खाते हैं, तो सप्ताह में 4-5 अंडे खा सकते हैं।
हालांकि दूध आप रोज पी सकते हैं और कई बार पी सकते हैं। ज्यादा दूध पीने का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। बता दें कि अंडा और दूध दोनों को काफी पसंद किया जाता है। इन दोनों ही चीजों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जिनसे शरीर को फायदा होता है। अंडा और दूध को प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स माना जाता है। जो लोग मसल्स की ग्रोथ को बेहतर करना चाहते हैं, उन्हें इन दोनों चीजों के सेवन करने की सलाह दी जाती है।
सुदामा/ईएमएस 15 मार्च 2024 -

चमत्कार: ब्लड कैंसर के साथ एचआईवी से भी मिली मुक्ति
चमत्कार: ब्लड कैंसर के साथ एचआईवी से भी मिली मुक्ति
-मरीज को 31 साल से था एचआईवी संक्रमण
कैलिफोर्निया एक मरीज ब्लड कैंसर के साथ एचआईवी संक्रमण से भी ग्रसित था और अब यह चमत्कारिक रुप से दोनों हो रोगों से मुक्त है। यह वाक्या कैलिफोर्निया के पॉल एडमंड्स का है जो कई दशकों से एचआईवी से संक्रमित थे, लेकिन कुछ सालों से उन्हें ब्लड कैंसर भी हो गया था और वे उसका इलाज करा रहे थे।
पांच साल पहले एक उपचार शुरू करने के बाद धीरे धीरे ऐसा चमत्कार हुआ कि आज एडमंड्स दोनों से मुक्त हैं। दो साल पहले एडमंड्स एक्यूट मायएलोगेनस ल्यूकेमिया (एएमएल) से मुक्त हुए और उसके दो साल बाद ही में उन्हें एचआईवी संक्रमण से भी पूरी तरह से मुक्त पाया गया है। यानि कि पांच साल पहले किए गए उपचार के बाद एजमंड्स अचानक ही पूरी तरह से ठीक होते पाए गए। जो ना केवल एडमंड्स के लिए चमत्कार था, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी किसी चमत्कार से कम नहीं था।इस अनोखे उपचार में डॉक्टरों ने स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया था जिसे चिकित्सा की भाषा में एलोजेनिक हीमोपोएटिक सेल ट्रांसप्लांटेशन कहते हैं।
यह थेरेपी ल्यूकेमिया मायेलोमा और लिमफोमा जैसे ब्लड कैंसर की उपचार का हिस्सा होता है जिसमें मरीज के बोन मैरो में बना स्टेम सेल से बना खून विकिरण या कैमियो थेरेपी से खत्म कर दिया जाता है और फिर समान जीन वाले डोनर के अच्छा खून बनाने वाली स्टेम सेल को मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। जिसके बाद वे कैंसर मुक्त कोशिकाएं बनाने लगती हैं। लेकिन एडमंड्स के मामले में कहानी यहीं नहीं रुकी, डॉक्टरों के अनुसार दान की गई स्टेम सेल्स का एक और फायदा हुआ, उनमें ऐसा जीन म्यूटेसन हो गया जो एचआईवी 1 का प्रतिरोध करता था।
एडम्ड्स को 31 इस ट्रांस्प्लांट से 31 साल पहले से एचआईवी -1 संक्रमण था और वे 20 सालों से एचआईवी एंटी रोट्रोवायरल थेरेप करवा रहे थे जो कि एचाईवी का इलाज नहीं है। यह वाकया न केवल मरीज के लिए चमत्कार साबित हुआ बल्कि खुद डॉक्टरों के लिए भी किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं रहा क्योंकि मरीज के इलाज में भी अजीब सा संयोग देखने को मिला है। -

कोविड का असर: भारतीयों के सर्वाधिक फेंफड़े खराब हुए
कोविड का असर: भारतीयों के सर्वाधिक फेंफड़े खराब हुए
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर द्वारा किया गया यह अध्ययन फेफड़ों पर कोविड-19 के प्रभाव की पड़ताल करने वाला भारत का सबसे बड़ा अध्ययन है। इसमें 207 व्यक्तियों की जांच की गई, जिससे ठीक हुए व्यक्तियों के फेफड़ों की कार्यप्रणाली, व्यायाम क्षमता और जीवन की गुणवत्ता में काफी कमी देखी गई।गंभीर कोविड से पीड़ित रह चुके भारतीयों में से कई के फेफड़े प्रभावित हुए हैं जिनमें से लगभग आधे ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है। यह एक चिंताजनक निष्कर्ष है जिसके लिए विशेषज्ञ विभिन्न कारणों को जिम्मेदार मानते हैं जिनमें व्यक्तियों के पहले से बीमारियों से पीड़ित होना और प्रदूषण शामिल है।
अध्ययन से पता चला कि गंभीर बीमारी से औसतन दो महीने से अधिक समय के बाद ठीक होने वाले भारतीयों में श्वसन संबंधी लक्षण देखे गए, जिसमें 49.3 प्रतिशत में सांस की तकलीफ और 27.1 प्रतिशत में खांसी की शिकायत दर्ज की गई। सीएमसी वेल्लोर में पल्मोनरी मेडिसिन के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डीजे क्रिस्टोफर ने कहा, अध्ययन से यह स्पष्ट है कि बीमारी की गंभीरता की हर श्रेणी में अन्य देशों के आंकड़ों की तुलना में भारतीय आबादी में फेफड़ों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावित हुई है। क्रिस्टोफर ने बताया, ‘‘हालांकि भारतीयों में इतनी क्षति का सटीक कारण जानना असंभव है, पहले से बीमारी से पीड़ित रहना फेफड़ों को क्षति पहुंचने का एक कारक हो सकता है, क्योंकि अन्य की तुलना में हमारी आबादी में लोगों के अन्य बीमारियों से पीड़ित रहने की दर अधिक थी। -

लहसून-हल्दी के सेवन से रक्त रहता है पतला |
लहसून-हल्दी के सेवन से रक्त रहता है पतला
-इनको खाने से नहीं होगा कभी हार्ट अटैक
नई दिल्ली गाढ़ा खून हार्ट अटैक, स्ट्रोक आदि के खतरों को बढ़ाता है। हालांकि खून को पतला और सेहतमंद रखना काफी आसान है। आप अपने खाद्य पदार्थों में खून को पतला करने वाले सुपर फूड्स शामिल कर सकते हैं। थक्कारोधी गुणों से भरपूर ये पदार्थ प्लेटलेट्स के एकत्रीकरण को रोककर रक्त में थक्के जमाने वाले कारकों के स्तर को कम करने में मदद करते हैं।
लहसुन सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें ऐसे यौगिक होते हैं जो रक्त के थक्के बनने में शामिल प्रोटीन फाइब्रिनोजेन के उत्पादन को कम करते हैं। इससे रक्त पतला रहता है और उसमें थक्के नहीं जमते हैं। अदरक को आयुर्वेद में भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें जिंजरोल्स नामक प्राकृतिक सूजनरोधी यौगिक होते हैं। जिंजरोल्स के कारण प्लेटलेट एकत्रीकरण कम होता है। जिससे रक्त पतला रहता है और स्वस्थ रक्त परिसंचरण को बनाए रखने में मदद मिलती है।भारतीय रसोइयों का यह अहम मसाला कई रोगों की अचूक दवा है।
हल्दी में करक्यूमिन नामक महत्वपूर्ण तत्व होता है। करक्यूमिन, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। इससे रक्त में थक्के नहीं जमते हैं और शरीर में रक्त का प्रवाह भी अच्छा रहता है। विटामिन सी हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। ऐसे में संतरे, नींबू, अंगूर, कीवी जैसे खट्टों फलों का नियमित सेवन करना चाहिए। इन फलों में विटामिन सी के साथ ही बायो फ्लेवोनॉयड्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं। ये दोनों ही शरीर की कोशिकाओं की दीवारों को मजबूत बनाते हैं, उनकी सूजन को दूर करते हैं। जिसकी मदद से खून में थक्के नहीं जम पाते और खून आसानी से शरीर में प्रवाहित होता है।ग्रीन टी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसमें मौजूद कैटेचिन नामक तत्व रक्त को पतला करके उसमें थक्के बनने से रोकता है।
कैटेचिन रक्त के थक्के बनने में शामिल दो प्रमुख प्रोटीन फाइब्रिनोजेन और थ्रोम्बिन को बाधित करके काम करता है। फाइब्रिनोजेन एक रक्त प्रोटीन है जो थक्के बनाने में मदद करता है। वहीं थ्रोम्बिन एक एंजाइम है जो फाइब्रिनोजेन को फाइब्रिन में बदलता है। कैटेचिन फाइब्रिनोजेन और थ्रोम्बिन के उत्पादन को कम करके रक्त के थक्के बनने को रोकते हैं। साथ ही इसके नियमित सेवन से कोशिकाओं में रक्त का प्रवाह भी अच्छा होता है। अगर आप अपने खून को पतला और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स नामक यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं। फ्लेवोनॉयड्स रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा करके रक्त को पतला करने में मदद करते हैं। बता दें कि सेहतमंद रहने के लिए अक्सर लोग काफी जतन करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने खून को स्वस्थ रखने के लिए काम करते हैं। जी हां, शरीर के तमाम अंगों के साथ ही खून की सेहत का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। खून का गाढ़ा होना या फिर इसमें थक्के जमना जानलेवा हो सकता है। -

पांच ऐसे फल बनाएंगे आपकी इम्यूनिटी मजबूत
पांच ऐसे फल बनाएंगे आपकी इम्यूनिटी मजबूत
-बदलते मौसम में थोड़ी सी लापरवाही पड सकती है भारी
बदलते मौसम में बीमारियों से शरीर को बचाने के लिए इम्यूनिटी मजबूत होनी जरुरी है। ये 5 ऐसे फल है, जो आपकी इम्यूनिटी मजबूत बनाएंगे। ये फल हैं संतरा, अनार, कीवी, आंवला, अंगूर हैं। संतरे में विटामिन-सी काफी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन-ए, पोटैशियम और फाइबर भी मौजूद होता है जो शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। रोजाना संतरे का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है और शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद मिलती है।
अनार में विटामिन-सी, विटामिन-ई, विटामिन-ए और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा अनार में आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम भी पाया जाता है जो शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करता है। इसमें विटामिन-सी पाया जाता है जिसका सेवन बदलते मौसम में करना फायदेमंद माना जाता है। कीवी में कई तरह के विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
कीवी में फाइबर, पौटेशियम और फोलेट पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। अंगूर विटामिन-सी, विटामिन के और कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। यह शरीर को किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है। अंगूर में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करते हैं। आंवला में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है ऐसे में इसका नियमित तौर पर सेवन करने से संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है। आंवला का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है।
आंवला में फाइबर और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। बता दें कि बदलते मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ जाती है। वैसे तो इन दिनों दिन में काफी तेज धूप निकल रही है जिसके कारण गर्मी लगने लगती है परंतु वहीं इसके विपरित रात में ठंडी हवाएं चल रही हैं जो आपको बीमार भी बना सकती हैं। दिन में हो रही गर्मी देखकर लोगों ने गर्म कपड़े पहनने बंद कर दिए हैं ऐसे में शाम को होने वाली इस ठंड के कारण लोगों को सर्दी-जुकाम और बुखार घेर रहा है। -

सोयाबीन बैड कोलेस्ट्रॉल भी होता है कम | सोयाबीन कर देता है शरीर की कमजोरी को दूर
सोयाबीन कर देता है शरीर की कमजोरी को दूर
-बैड कोलेस्ट्रॉल भी होता है कम
हैल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सोयाबीन कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और विटामिंस से भरपूर होता है। इसके साथ ही इसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फटी एसिड्स भी पाए जाते हैं, जो कि हमारे हार्ट के लिए बेहद फायदेमंद होता है। सोयाबीन में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है।
स्टडी के मुताबिक तो सोयाबीन के नियमित सेवन से शरीर से बाद कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है। इसके साथ ही दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। डायटीशियन एक्सपर्ट के अनुसार सोयाबीन में पाए जाने वाले पोषक तत्व कुपोषण को मिटाने में कारगर हैं। इसमें कई जरूरी अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं जो कि मांसपेशियों और हड्डियों को स्वस्थ रखने में फायदेमंद हैं।
एक स्वस्थ इंसान को एक दिन में 100 ग्राम सोयाबीन का सेवन करना चाहिए। आप इसे कई तरह से खा सकते हैं। इससे आपकी इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है। बता दें कि सोयाबीन प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है। शाकाहारी लोगों के लिए तो ये सबसे प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है। ये नई कोशिकाएं भी भी बनाता है। जिम जाने वाले लोगों को इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। -

साइलेंट अटैक-17 साल के लड़के की सोते में ही मौत | 17 साल के लड़के की सोते सोते ही हो गई संदेहास्पद मौत
फिर एक साइलेंट अटैक-17 साल के लड़के की सोते में ही मौत
इन्दौर :-डाक्टरों ने एक 17 साल के लड़के की सोते सोते ही हो गई संदेहास्पद मौत का कारण साइलेंट अटैक बताया है। मृतक के परिजनों के अनुसार वह रोजाना के रूटीन अनुसार खाना खा थोड़ी देर बाद सो गया था सुबह जब उसकी मां उसे उठा रही थी तो उसने कोई जवाब नहीं दिया । हिलाने पर भी जब उसके शरीर में कोई हलचल नही हुई तो उसे तुरंत नजदीक के निजी अस्पताल ले गए जहां चेकअप के बाद उसे एमवाय ले जाने की सलाह दी गई एम वाय के डाक्टरों ने उसे प्रारंभिक जांच के बाद ही मृत घोषित कर दिया । डॉक्टरों ने मौत के लिए साइलेंट अटैक की आशंका व्यक्त की है । फिलहाल शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। मामला तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है तेजाजी नगर थाना पुलिस के अनुसार तुषार पिता दर्शन शिवदासानी उम्र सत्रह साल निवासी एनआरके बिल्डिंग की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई । तुषार के मामा समीर ने पुलिस को बताया कि तुषार को सुबह करीब 11 बजे के लगभग मां काजल कमरे में उठाने गई । आवाज देने पर काफी देर तक उसने जवाब नहीं दिया और न ही उसके शरीर में कोई हलचल दिखाई थी । इसके बाद बड़े भाई को आवाज दी । फिर तुषार को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे । यहां डॉक्टरों ने एमवाय अस्पताल ले जाने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि तुषार 12 वीं कक्षा में पढ़ता था । उसके पिता का कपड़े का व्यवसाय है और इसी सिलसिले में वे खरीदारी के लिए दिल्ली गये हुए थे। तुषार का एक बड़ा भाई पिता के साथ कपड़े की दुकान संभालता है । पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में डाक्टरों द्वारा जांच कर बताने पर साइलेंट अटैक जैसी बात सामने आ रही है । बाकी स्थिति पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। विगत दिनों से लगातार इन्दौर में हो रही साइलेंट अटैक मौतों के मामले में पिछले पांच दिनों में यह सातवां मामला है। -

टाइप 2 डायबिटीज को रिवर्स करने में दखनी मिर्च कारगर | लाल मिर्च और काली मिर्च अंदर पाइपेरिन और कैप्साइसिन मौजूद
टाइप 2 डायबिटीज को रिवर्स करने में दखनी मिर्च कारगर
-भरा पड़ा है जान बचाने वाला इंसुलिन
टाइप 2 डायबिटीज को रिवर्स करने के लिए दखनी मिर्च कारगर साबित हो सकती है।लाल मिर्च और काली मिर्च के फायदे जबान पर याद रहते हैं लेकिन सफेद मिर्च की उतनी बात नहीं की जाती। इसे दखनी मिर्च भी कहते हैं, जिसे सब्जी, दूध और लड्डू में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
पुराने वक्त से इस जड़ी बूटी को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं। सफेद मिर्च के दानों को पाउडर बनाकर इस्तेमाल करते हैं। इन दानों के अंदर पाइपेरिन और कैप्साइसिन मौजूद होता है। शोध बताता है कि ब्लड शुगर कम करने के लिए डायबिटीज की दवा के साथ पाइपेरिन लेना चाहिए। ये तत्व इंसुलिन के इस्तेमाल को बेहतर बनाते हैं और ग्लूकोज का इस्तेमाल बढ़ जाता है। जिन बच्चों या बुजुर्गों की नजर कमजोर हो गई है उनके लिए यह मिर्च खाना लाभदायक होता है। कहा जाता है कि इसका सेवन मोतियाबिंद जैसी आंखों की बीमारी से बचा सकता है। बादाम पाउडर, त्रिफला पाउडर, सौंफ और चीनी के साथ थोड़ा दखनी मिर्च पाउडर मिलाकर सेवन करें। इस देसी चूर्ण से खांसी, जकड़न या सर्दी का नाश किया जा सकता है।
दखनी मिर्च की तासीर गर्म होती है व एंटी इंफ्लामेटरी और एंटी बायोटिक गुण कफ की जड़ को मिटाने का काम करते हैं। शहद में मिलाकर इसे लेने से तुरंत फायदा मिलता है। दखनी मिर्च फ्लेवेनोइड्स से भरी है जो खून का सर्कुलेशन स्मूथ बनाती है। इस वजह से हाई बीपी के मरीजों को इसे खाने की सलाह दी जाती है। मोटापे के मरीजों का पाचन बढ़ाकर यह फैट बर्निंग को तेज करने में मदद करती है। बता दें कि सेहत की देखभाल करने के बाद भी कुछ बीमारियां शरीर को पकड़ ही लेती हैं, जिनमें डायबिटीज भी शामिल है। कई लोग ऐसे भी हैं जो डेली एक्सरसाइज करते हैं लेकिन उनका ब्लड शुगर हाई रहता है।
यह मेटाबॉलिक बीमारी लाइलाज है जो इंसुलिन की गड़बड़ के साथ शुरू होती है। जबतक इसका लेवल बैलेंस नहीं किया जाएगा, तबतक डायबिटीज मेलिटस को कंट्रोल नहीं कर सकते। शरीर कई बार इंसुलिन का उत्पादन कम कर देता है और कई बार इसका इस्तेमाल करना ही बंद कर देता है। इसलिए तमाम तरीकों से इंसुलिन को बैलेंस करने की कोशिश की जाती है ताकि ब्लड शुगर का लगातार इस्तेमाल होता रहे। इस तरह खून में ग्लूकोज जरूरत से ज्यादा नहीं बन पाता। -

इंटर्नेसिया ग्रुप ऑफबिजनेस कंपनी द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन भोपाल में
आज भोपाल के कोलार क्षेत्र में इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ बिजनेस कंपनी द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ जिसमें लगभग 22 डोनर ने रक्तदान किया यह कंपनी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निशुल्क ट्रेनिंग प्रोवाइड करती है और आज की नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है भोपाल के सेंटर में लगभग 250 युवा युवतियां अपनी ट्रेनिंग लेकर धन अर्जित कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं ऐसा सिलसिला लगातार जारी है इस कंपनी की भोपाल मुख्य प्रबंधक सपना रौतेला जी हैं और उप प्रबंधक सुधीर मर्सकोले जी हैं आज रक्तदान शिविर में क्षेत्रीय पार्षद वार्ड 82 श्रीमती ज्योति मिश्रा भारतीय जनता पार्टी मंडल महामंत्री गुड्डू भदोरिया कोलार थाने टीआई श्री जय सिंह जी मोटिवेशनल स्पीकर श्री मुकेश सक्सेना जी और सम्मानीय अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर रक्तदान शिविर का आयोजन प्रारंभ करवाया औरत रक्तदान करने के लिए युवक-युवती अपने मन से एक अच्छी विचारधारा को लेकर सामने आए लगभग 22 डोनर ने रक्त दान किया इस शाखा के उप प्रबंधक श्री सुधीर मर्सकोले कर करण सिंह राजपूत इत्यादि युवक-युवतियों ने रक्तदान का सराहनीय कार्य किया है