इस्लामाबाद । आतंकी हमले में पाकिस्तान के सात सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भड़क गए हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में आतंकी हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। आतंकी पाकिस्तान के हों या दूसरे देश के,उनकी हरकत का करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंक फैलाने के लिए उसकी सीमा में प्रवेश करने वाली हर ताकत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा और प्रत्येक शहीद सैनिक के खून के लिए उसे जवाबदेह बनाएगा। पांच सैनिकों सहित एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक कैप्टन की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी एक बयान में जरदारी के हवाले से कहा गया, पाकिस्तान ने फैसला किया है कि जो कोई भी हमारी सीमा, घर या देश में घुसकर आतंक करेगा, हम उसे कड़ा जवाब देंगे, चाहे वह कोई भी हो या किसी भी देश से हो।
10 मार्च को पाकिस्तान के 14वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभालने वाले जरदारी ने कहा, यह महान बलिदान हमारे वीर बेटों के दृढ़ संकल्प का एक और गौरवशाली प्रमाण है, जिन्होंने हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया है। पूरा देश हमारे सशस्त्र बलों के साथ एकजुटता से खड़ा है। शहीद हुए सेना के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने ‘आतंकवादी गतिविधियों का पूरी ताकत से जवाब देने’ का संकल्प दोहराया। जरदारी ने कहा कि देश के बहादुर भाई, बेटे और दोस्त सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, उन्होंने वादा किया कि मिट्टी के बेटों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा।
अंतिम संस्कार में ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शमशाद मिर्जा, सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार के साथ-साथ आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी, वरिष्ठ सेवारत सैन्य और नागरिक अधिकारी, रिश्तेदार भी शामिल हुए। प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हाफिज गुल बहादुर समूह ने सैन्य चौकी पर आत्मघाती बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली। अंतिम संस्कार रावलपिंडी में किया गया। हमले की जिम्मेदारी लेने वाला पाकिस्तानी तालिबान नेता हाफिज गुल बहादुर का समूह उत्तरी वजीरिस्तान में सबसे मजबूत आतंकवादी समूहों में से एक है। इससे पहले, वह 2014 में ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब के बाद अफगानिस्तान भाग गया था।इससे पहले सेना ने कहा था कि सैनिकों ने शनिवार तड़के एक सैन्य प्रतिष्ठान में घुसपैठ की शुरुआती कोशिश को नाकाम कर दिया।
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आतंकियों पर लगाएंगे लगाम-राष्ट्रपति आसिफ अली
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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फिर मिली चुनावी जीत
25 साल से काबिज राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फिर मिली चुनावी जीत!
मॉस्को। बीते 25 सालों से रुस की सत्ता पर काबित राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन एक बार फिर राष्ट्रपति का चुनाव लगभग जीत गए हैं। रूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान खत्म होने पर 24 प्रतिशत क्षेत्रों में मतों की गिनती के शुरुआती रुझानों से पता चला कि पुतिन के समर्थन में लगभग 88 प्रतिशत वोट पड़े । आलोचकों के मुताबिक, रूस के चुनाव में मतदाताओं को निरंकुश शासक के खिलाफ कोई वास्तविक विकल्प नहीं दिया गया। रूस में तीन दिवसीय राष्ट्रपति चुनाव शुक्रवार को बेहद नियंत्रित माहौल में शुरू हुआ, जहां पुतिन या यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर उनकी सार्वजनिक आलोचना की अनुमति नहीं थी। उन्होंने चुनाव से पहले युद्ध क्षेत्र में रूस की सफलता का दावा किया, लेकिन रविवार तड़के पूरे रूस में बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन हमले ने मॉस्को के सामने आने वाली चुनौतियों की याद दिला दी। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रात भर में 35 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जिनमें से चार रूस की राजधानी मॉस्को के पास मार गिराए गए। मॉस्को के महापौर सर्गेई सोबयानिन ने कहा कि कोई हताहत या क्षति नहीं हुई है। पुतिन के सबसे मुखर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एलेक्सी नवलनी की पिछले महीने आर्कटिक जेल में मौत हो गई और उनके अन्य आलोचक या तो जेल में हैं या निर्वासन में हैं। पुतिन को क्रेमलिन अनुकूल पार्टियों के तीन प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने उनके 24 साल के शासन या दो साल पहले यूक्रेन पर उनके आक्रमण की किसी भी आलोचना से परहेज किया है। -

एंडरसन का रिकार्ड शायद ही कोई तेज गेंदबाज तोड़ पाये : ब्रॉड
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने अपने साथी खिलाड़ी जेम्स एंडरसन की जमकर प्रशंसा की है। ब्रॉड ने कहा कि किसी को भी उनके समर्पण और कौशल पर संदेह नहीं करना चाहिए। 41 साल की उम्र में भी जिस प्रकार वह गेंदबाजी करते हैं उससे सभी को प्रेरणा मिलती है। एंडरसन 700 टेस्ट विकेट पूरे करने वाले पहले तेज गेंदबाज हैं। ब्रॉड ने कहा, यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है और मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य तेज गेंदबाज इस रिकार्ड की बराबरी कर पायेगा। साथ ही कहा कि बिना समर्पण और मानसिक लचीलेपन के कोई भी 41 साल की उम्र तक नहीं खेल सकता। पिछले दो दशक में उन्होंने अलग-अलग हालातों में खेलते हुए ये सफलता हासिल की है। ब्रॉड ने कहा, उन्होंने शीर्ष स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के तरीके ढूंढ लिए हैं और अभी भी बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि जब आप इसके बारे में सोचते हैं तो यह असाधारण है।
ब्रॉड ने कहा कि वह चाहते थे कि इस साल जुलाई से वेस्ट इंडीज और श्रीलंका के खिलाफ एंडरसन को अपना 700 वां विकेट लेते देखे पर ये उपलब्घि उन्होंने पहले ही हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि ये तेज गेंदबाज इस साल 42 साल का हो जाएगा। ऐसे में वह कब तक टेस्ट गेंदबाज बने रहेंगे ये देखना होगा। उन्होंने कहा, एंडरसन के संन्यास पर लोग सवाल पूछ रहे हैं पर ये कब होगा। इसका मुझे अंदाजा नहीं है। साथ ही कहा कि उसे पता चल जाएगा कि जाने का सही समय कब है, और केवल वह ही यह निर्णय ले सकता है।
वहीं कप्तान बेन स्टोक्स और कोच ब्रेंडन मैकुलम चाहेंगे कि वह ऑस्ट्रेलिया में एशेज को ध्यान में रखते हुए अगले 18-24 महीनों तक इसी प्रकार बेहतर प्रदर्शन करें पर एंडरसन तब तक 43 साल के हो जाएंगे और शायद वह इतना आगे के बारे में नहीं सोच रहे हैं। -

भारत और ब्रिटेन दाई तो अमेरिका, फ्रांस में बाई ओर होता है स्टेयरिंग
भारत और ब्रिटेन सहित दुनिया के अधिकांश देशों में बाईं ओर वाहनों में स्टेयरिंग लगाया जाता है। वहीं अमेरिका, फ्रांस और हॉलैंड सहित बहुत से देशों में गाड़ियों में स्टेयरिंग दाईं ओर होता है। यह देखकर आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर ये दाएं-बाएं का चक्कर क्यों है? गाड़ियों में स्टेयरिंग दाईं और बाईं तरफ होने का कारण अलग-अलग देशों में सड़क पर चलने के नियम अलग-अलग होना है। भारत और ब्रिटेन में सड़क के बाईं ओर चला जाता है। इसलिए यहां वाहनों का स्टेयरिंग दाईं ओर होता है। इसी तरह अमेरिका सहित जिन देशों में सड़क के दाईं ओर चलने का प्रचलन है, वहां स्टेयरिंग बाईं ओर लगाया जाता है। इसीलिए गाड़ियां भी लेफ्ट हैंड ड्राइव और राइट हैंड ड्राइव, दो तरह की होती हैं।
पुराने जमाने में लोग सुरक्षा के लिए तलवार साथ लेकर चलते थे। ज़्यादातर लोग राइटी होते हैं तो ज़्यादातर तलवारबाज़ दाएं हाथ से तलवार चलाते थे। और इसीलिए जब वो घोड़ा लेकर सड़क पर निकलते तो सड़क की बाईं ओर चलते। ताकि आगे से आने वाले व्यक्ति को उनकी दाईं तरफ से ही गुज़रना पड़े। अगर वो दुश्मन निकलता तो उसपर आसानी से वार किया जा सकता था। 18वीं सदी में फ्रांस और अमेरिका में माल ढुलाई के लिए बड़ी-बड़ी बग्घियां बनीं जिन्हें कई घोड़े जोतकर खींचा जाता था। इन बग्घियों में गाड़ीवान बैठने को जगह नहीं होती थी। तो एक आदमी किसी एक घोड़े पर बैठकर बाकी को हांकता था। अब चाबुक चलाने के लिए गाड़ीवान को अपना दायां हाथ फ्री रखना होता था। इसलिए वो बाईं तरफ जुते आखिरी घोड़े पर बैठता था। अब चूंकि ये आदमी बग्घी की बाईं तरफ बैठा होता था, वो बग्घी सड़क की दाईं तरफ चलाता था ताकि सामने से आने वाली गाड़ियां उस तरफ से निकलें जहां वो बैठा हुआ है।
इससे दो बग्घियों के क्रॉस होते वक्त नज़र रखी जा सके।भारत में बाईं ओर चलने का रिवाज इंग्लैंड की देन है। भारत पर लंबे समय तक इंग्लैंड का राज रहा। ऐसे में अंग्रेजों ने भारत में भी अपने देश की तरह ही सड़क के बाईं ओर चलने का नियम बनाया। जब भारत में गाडियां आईं तो उनके स्टेयरिंग भी इंग्लैंड की तरह दाईं ओर लगाए गए। वहीं, अमेरिका में 18वीं सदी से ही बग्घियों के कारण दाईं ओर चलने का रिवाज था तो गाड़ियों के स्टेयरिंग लेफ्ट साइड में लगने शुरू हो गए। 1969 में हुई एक रिसर्च में सामने आया था कि बाईं ओर चलने वाले ट्रैफिक से कम हादसे होते हैं।
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भारत ही नहीं पाकिस्तान में धूमधाम से मनाई जा रही महाशिवरात्रि
भारत ही नहीं पाकिस्तान में धूमधाम से मनाई जा रही महाशिवरात्रि
उमरकोट के महादेव मंदिर में पहुंचे रहे शिव भक्त
इस्लामाबाद । भगवान शिव की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि शुक्रवार को पूरे उल्लास के साथ मना रहा है। भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही है। पाकिस्तानी पत्रकार दिलीप कुमार खत्री ने सिंध प्रांत के उमरकोट में स्थित महादेव मंदिर का वीडियो जारी किया है, जहां महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा करने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने इस पाकिस्तान में मौजूद विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक प्रतीक कहा।
वीडियो पोस्ट कर दिलीप ने लिखा, वार्षिक महाशिवरात्रि उत्सव के लिए सिंध के उमरकोट के महादेव मंदिर में 250,000 हिंदू भक्त जश्न मनाने के लिए एकजुट हुए। पाकिस्तान में विविधता और सांस्कृति समृद्धि का एक सुंदर प्रमाण। मंदिर के बाहर शूट किए गए वीडियो में दिख रहा है कि हिंदू श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं, इसमें महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी है।
पाकिस्तान में मौजूद है 5000 साल पुराना शिव मंदिर
पाकिस्तान आज भले ही इस्लामिक गणराज्य के रूप में है, लेकिन कभी भारत का ही हिस्सा रहे इस क्षेत्र में आज भी कई बहुत महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक स्थल मौजूद हैं। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल कटासराज धाम है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में स्थित शिवमंदिर को 5000 साल पुराना माना जाता है। इस धाम में एक कुंड है जिसके बारे में मान्यता है कि यह भगवान शिव के आंसुओं से बना है। जब सती की मौत के बाद उनके वियोग के दुख में भगवान शिव रोए तो उनके आंसू इसी कुंड में गिरे थे। पाकिस्तान के कटासराज मंदिर में महाशिवरात्रि मनाने भारत से 62 हिंदू श्रद्धालुओं का जत्था भी पहुंचा है। दो दिन पहले अटारी बॉर्डर के जरिए 112 श्रद्धालु पाकिस्तान के लिए रवाना हुए थे, जिनमें सिख भी शामिल थे। इनमें से हिंदू श्रद्धालु महाशिवरात्रि के लिए कटासराज पहुंचे हैं। इन श्रद्धालुओं में केंद्रीय सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष शिव प्रताप बजाज भी हैं। -

ब्रिटेन के एक शख्स की लाखों की पाउंड की लाटरी क्या निकली
लॉटरी में जीते लाखों पाउंड लेकिन पड गए जान बचाने के लाले
-चाकू लिए कुछ बदमाश जान लेने को थे उतारू
ब्रिटेन के एक शख्स की लाखों की पाउंड की लाटरी क्या निकली, उसे जान बचाने के लाले पड गए। शख्स के सामने चाकू लिए कुछ बदमाश खड़े थे और उनकी जान लेने पर उतारू थे। ब्रिटेन के रहने वाले ली डेविस और कैरीएन कोपस्टिक ने सितंबर 2017 में लॉटरी टिकट खरीदा। और कुछ ही दिनों बाद पता चला उसने मेगा जैकपॉट जीत लिया है। ली ने कहा, जीतने के बाद हमारी दुनिया बदल गई थी। हमने एक घर में निवेश किया। शादी करने की योजना बनाई। यहां तक कि मशहूर ब्रांड के कपड़े और आभूषणों पर कुछ पैसे खर्च किए।अगले दिन हम घर में लेटे हुए थे, तभी काले कपड़े पहने हुए लोग, चाकू और सरिये लेकर कमरे में आए।
हम उन्हें देखकर सन्न रह गए। वे चिल्लाए- ‘पैसा कहां है? सोना कहां है?’ तभी चाकू लिए एक शख्स कैरीएन के पास गया और उसे बिस्तर से बाहर निकलने के लिए कहा। वहां-वहां ले गए, जहां सब कुछ रखा गया था। फिर सारा लूटकर ले गए। ली ने कहा, उनके जाने के बाद मैं तेजी से नीचे आया और पुलिस को बुलाया। हम भाग्यशाली थे कि उन्होंने बच्चों को नहीं जगाया। वरना उन्हें काफी चोट पहुंचती। बदमाश 4 लाख का हार, 11 लाख का सोना और कंगन अपने साथ ले गए। हम इतने डर गए थे कि अपने साथियों तक को इसके बारे में नहीं बताया।
बदमाश हमारी पूरी दौलत लूटकर ले गए। अब हमारे पास कुछ भी नहीं बचा था।ली ने कहा, लुटेरों को पता था कि वे क्या कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने पूछा था कि पैसे और सोना कहां है। उन्हें पता था कि यह घर में होने की संभावना है। उन्होंने मेरी बेटी के जन्मदिन के गिफ्ट भी लेने की लूटने की। वे मुझे बार से मार रहे थे और शांत रहने के लिए कह रहे थे। मेरी मंगेतर इतनी डर गई थी कि कहीं उसके साथ कुछ बुरा न करें। लेकिन राहत की बात थी कि वे सिर्फ सोना लेकर चले गए। -

विज्ञान का चमत्कार, अब दुनिया में बच्चे अपंग पैदा नहीं होंगे
विज्ञान का चमत्कार, अब दुनिया में बच्चे अपंग पैदा नहीं होंगे
लंदन साइंस की दुनिया में फिर चमत्कार हुआ है। अक्सर सुनाने में आता हैं कि कई बच्चे जब पैदा होते हैं, तब उनके अंग पूरे विकसित नहीं होते। किसी बच्चे की आंखें नहीं खुलतीं, तब किसी का सिर आधा अधूरा बना रहता है। किसी के फेफड़े और किडनी पूरी तरह काम नहीं करते हैं। अब ऐसी जेनेटिक बीमारियों का इलाज की उम्मीद जगा गई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार गर्भ में पल रहे शिशु के अंग लैब में तैयार करने की बात कही है। उनका दावा है कि उन्हें कुछ ऐसा फार्मूला मिला है, जिससे प्रेग्नेंसी के अंतिम दिनों में वे शिशुओं के अंगों और कोशिकाओं को विकसित कर सकते हैं। अजन्मे शिशुओं की स्टेम कोशिकाओं से मिनी अंग विकसित किए जा सकते है। अगर ये कामयाब रहा, तब दुनिया में बच्चे अपंग पैदा नहीं होंगे। क्योंकि गर्भ में ही उनके अंगों को विकसित किया जा सकेगा।
दुनिया में हर साल लाखों बच्चे गर्भ में विकसित हुई बीमारी के साथ पैदा होते हैं। सबसे ज्यादा डायाफ्राम हर्निया के चांस होते है, जिसमें पेट के सारे अंग अपनी जगह से खिसककर छाती में चले जाते हैं। दूसरी दिक्कत सिस्टिक फाइब्रोसिस की होती है, इसमें कुछ ग्रंथियों में से असामान्य रूप से गाढ़े पदार्थ का रिसाव होने लगता है, जो फेफड़ों और पाचन तंत्र सहित कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इस तरह की जेनेटिक बीमारी सिस्टिक किडनी डिसीज है। इसमें फ्लूड से भरी थैली यानी सिस्ट बन जाते हैं, जो किडनी के लिए गंभीर समस्याएं पैदा करते हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसतरह के बीमारियों को नए फार्मूले के द्वारा ठीक किया जा सकेगा।
आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 22वें हफ्ते में भ्रूण के साथ छेड़छाड़ करना गैरकानूनी होता है। इससे बच्चे को दिक्कत हो सकती है। इसीलिए जब तक बच्चे को कोई गंभीर बीमारी न हो, इन हफ्तों में डॉक्टर सर्जरी का खतरा मोल नहीं लेते। लेकिन विशेषज्ञों दावा है कि अब वे एमनियोटिक थैली में तैरती कोशिकाओं से छोटे अंग विकसित कर सकते हैं, वहां भी बच्चे को छुए बिना। एमनियोटिक द्रव भ्रूण द्वारा निर्मित होता है और गर्भ में बच्चे को घेरे रहता है। यह द्रव बच्चे के शरीर से बहता रहता है और कोशिकाओं तक डीएनए लेकर जाता है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की डॉ. मटिया गेरली ने कहा, नई रिसर्च हमें बच्चे को बिना छुए, उसके अंगों को ठीक करने की राह में आगे बढ़ रहे है। यह हमें आनुवंशिक बीमारियों के बारे में और अधिक सिखा सकती है। हम बेहतर तरीके से जान सकते हैं कि बच्चों में होने वाली जेनेटिक बीमारियों से कैसे निपटा जाए। हम इस रहस्य का भी खुलासा करने में सक्षम हो सकते हैं कि गर्भावस्था के बाद बच्चों का विकास किस तरह होता है। आमतौर पर हम लेट प्रेग्नेंसी के बारे में बहुत कम जानते हैं। अब हमने एम्नियोटिक द्रव कोशिकाओं से जो ऑर्गेनॉइड बनाए हैं, वे उन ऊतकों के कई कार्यों को दर्शाते हैं जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।
शोधकर्ताओं ने 12 प्रेग्नेंट महिलाओं के गर्भ से उनकी गर्भावस्था के 34 सप्ताह तक के फेफड़े, गुर्दे और छोटी आंत की कोशिकाओं को एकत्र किया। फिर लैब में उन पर रिसर्च की और एम्नियोटिक द्रव कोशिकाओं से छोटे-छोटे अंग विकसित किए। अब इनका अध्ययन किया जाएगा। डॉ. गेरली ने बताया कि जब हमने जन्मजात डायाफ्रामिक हर्निया वाले बच्चों पर इसका अध्ययन किया, तब देखा कि यह काम कर रहा है। उनके अंग फिर से पुरानी जगहों पर आ गए। सर्जन प्रोफेसर पाओलो डी कोप्पी ने कहा, यह पहली बार है जब हम जन्म से पहले किसी बच्चे की जन्मजात स्थिति के बारे में अच्छे से जान पा रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान में यह क्रांतिकारी कदम होगा। हालांकि, यह अभी ये दावा नहीं कर रहे कि हम इस कर ही सकते हैं, लेकिन नतीजे निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाले हैं। -

तीसरे विश्व यूद्ध की आहट: अमेरिका रूस पर कर सकता है हमला
तीसरे विश्व यूद्ध की आहट: अमेरिका रूस पर कर सकता है हमला
मॉस्को(। रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों का एक सैन्य गठबंधन बनाकर रूस पर हमला कर सकता है। अमेरिका के नेतृत्व में जॉइंट ऑपरेशनल फोर्स रूस के अहम सैन्य ठिकानों पर ग्लोबल स्ट्राइक कर सकते हैं। अमेरिकी और पश्चिमी देशों के हमले में फाइटर जेट और अलग-अलग तरह की मिसाइलों के साथ रूस पर अचानक और ज़ोरदार हमला होगा। पश्चिमी सैन्य गठबंधन का लक्ष्य एक साथ किए गए हमले में रूसी ठिकानों को तबाह करने का होगा। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिससे पूरी दुनिया में सनसनी मच गई है। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ दो साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में जल्द ही सबसे खतरनाक मोड़ आने वाला है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में पश्चिमी देशों के हरसंभव मदद के बावजूद यूक्रेन पीछे हटने को मजबूर है। रूस को रोकने के लिए नाटो सहयोगियों की तरफ से अलग-अलग तरह के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने नाटो सैनिकों को यूक्रेन भेजने का प्रस्ताव दिया था। जर्मनी के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हाल में लीक हुए आडियो के मुताबिक़ क्रीमिया पुल को उड़ाने के लिए जर्मनी में रणनीति बनाई जा रही थी। रूस का मानना है कि लगातार हो रही पराजय से अमेरिका एवं पश्चिमी देशों में बैचेनी है और ऐसे में एक सैन्य गठबंधन के नाम पर अमेरिका अपने कुछ सहयोगी देशों के साथ मिलकर रूस पर स्ट्राइक कर सकता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के इस सैन्य रणनीति का खुलासा रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक पत्रिका में किया है। रूसी रक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक़ रूस और नाटो की सीधी जंग से पहले इस तरह का एक बड़ा और सरप्राइज़ हमला होने की बहुत अधिक संभावना है। अमेरिका के नेतृत्व में ज्वाइंट ऑपरेशनल फ़ोर्स बनाने की बात लगभग वैसी ही है जैसा कि मध्य-पूर्व में हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए अमेरिका और सहयोगी देशों ने ओपरेशन गार्जियन बनाया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह का गठबंधन अमेरिका या पश्चिमी देशों को यूक्रेन जंग में सीधी एंट्री का मौका भी दे देगी और नाटो के सभी देशों को इस युद्ध में शामिल होने की बाध्यता भी नहीं होगी। -

पुतिन के खुफिया खुलासों से चीन के फूले हाथ-पैर
पुतिन के खुफिया खुलासों से चीन के फूले हाथ-पैर
हमला होने पर दगा देगा चीन पर परमाणु बम
मास्को । रूस की परमाणु हमले की योजना के खुलासे से दुनियाभर में हड़कंप है। रूस के इस सीक्रेट प्लान में चीन का भी जिक्र है। प्लान में कहा गया है कि अगर चीन के साथ युद्ध जैसी स्थिति आती है तब रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर बम से हमला करेगा है। रूस की खुफिया युद्ध योजना साल 2009 से 2014 के बीच बनी थी। तब भी व्लादिमीर पुतिन ही रूस के राष्ट्रपति थे। इसमें कहा गया है कि चीन रूस के फार ईस्ट इलाके पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है। इस बड़े खुलासे के बाद चीन ने अब चुप्पी साध ली है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन दोनों ही दावा करते हैं कि उनके बीच नो लिमिट वाली दोस्ती हो गई है। रूसी खुलासे के बाद अब चीन की सरकार सदमे में आ गई है।
रिर्पोट के मुताबिक पुतिन की सेना ने इस तरह के किसी चीनी हमले से निपटने के लिए कई बार जवाबी हमले का अभ्यास भी किया है। रूसी दस्तावेज के हवाले से कहा, कमांडर-इन-चीफ ने दुश्मन द्वारा दूसरी-इकोलोन इकाइयों को तैनात करने और दक्षिण द्वारा मुख्य हमले की ओर आगे बढ़ने की धमकी देने की स्थिति में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया है। साल 2008 से साल 2014 तक के गोपनीय दस्तावेज बताते हैं कि रूस पहले से स्वीकार किए गए स्तर से काफी कम सीमा पर परमाणु हथियारों को तैनात करने के लिए तैयार है, जिससे विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बीच चिंता पैदा हो गई है।
लीक हुई सामग्री यह भी संकेत देती है कि रूस के पूर्वी सैन्य जिले ने चीनी हमले से जुड़े विभिन्न परिदृश्यों के लिए सक्रिय रूप से तैयारी की है, जो रूस की रक्षा रणनीति में उसके परमाणु शस्त्रागार की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।
चीन के दूतावास ने कहा, सिद्धांत रूप में, चीन एक रक्षात्मक परमाणु रणनीति के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक न्यूनतम स्तर की परमाणु क्षमता बनाए रखता है। हमारा किसी भी देश के साथ परमाणु हथियारों की होड़ में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। परमाणु हथियार रखने वाले देशों में चीन की एक अनूठी परमाणु नीति है और हमने लगातार उच्च स्तर की स्थिरता और सततता बनाए रखा है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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काश अमेरिका में भी पीएम मोदी जैसा कोई नेता होता
अमेरिका के लोगों को चाहिए मोदी जैसा नेता
वॉशिंगटन | एक बड़े अमेरिकी बिजनेसमैन ने ख्वाहिश जताई है कि काश अमेरिका में भी पीएम मोदी जैसा कोई नेता होता। इस अमेरिकी बिजनेसमैन का नाम जॉन चैंबर्स है। जॉन चैंबर्स यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष हैं। चैंबर्स ने पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की अनुमोदन रेटिंग 50फीसदी से कम बताई।जॉन चैंबर्स ने कहा, भारत का दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना तय है। उन्होंने यह भी कहा कि एक दशक से अधिक समय में भारत की अर्थव्यवस्था चीन से 90फीसदी बड़ी हो जाएगी। भारत के शीर्ष पर पहुंचने का एक कारण उसकी जोखिम लेने की इच्छा है। उन्होंने कहा, कुछ साल पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। चैंबर्स के मुताबिक, यह पीएम मोदी के प्रभाव के कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सात साल से कुछ भारतीय कंपनियों सहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दांव लगा रहे हैं। इस प्रोद्योगिकी का दुनिया पर सकारात्मक असर पड़ेगा और इससे प्रत्येक नागरिक लाभान्वित होगा।
अमेरिकी टेक जगत की शख्सियत जॉन चैंबर्स ने कहा, आपके प्रधानमंत्री के बारे में जाहिर तौर पर मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मुझे लगता है कि वह आज दुनिया के सबसे अच्छे नेता हैं। और मेरी इच्छा है कि हमारे पास अमेरिका में भी ऐसा कोई हो। हमें ऐसा कोई राजनीतिक नेता नहीं मिला जिसकी अनुमोदन रेटिंग 50फीसदी से अधिक हो, और पीएम मोदी की 76फीसदी है।