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दोस्त रूस का कब तक साथ देगा भारत? क्वाड के संयुक्त बयान के मायने समझ लीजिए

नई दिल्ली : नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार को बैठक हुई। बैठक में समूह के मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई गई। खास बात है कि बैठक के बाद भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान सदस्यों के विदेश मंत्रियों की तरफ से संयुक्त बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया कि यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस की परमाणु हमले की धमकी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष तथा तथा इसकी वजह से उत्पन्न हालात पर अपनी प्रतिक्रिया पर हम चर्चा करते रहे हैं। इस बात पर सहमत हैं कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल या इस तरह की धमकी को स्वीकार नहीं करेंगे। क्वाड की तरफ से इस तरह के संयुक्त बयान भारत की बदली भूमिका को लेकर चर्चा हो रही है। सवाल है कि क्या भारत अब अपने पुराने दोस्त के खिलाफ जा रहा है।

संयुक्त बयान का क्या होगा असर?
संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार यूक्रेन में समग्र, तत्काल एवं स्थायी शांति की जरूरत पर बल दिया है। संयुक्त बयान में कहा गया कि हमने संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति की आवश्यकता को रेखांकित किया। हमने जोर दिया कि नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का सम्मान करना चाहिए। भारत ने अभी तक यूक्रेन में रूस के हमले को लेकर खुलकर विरोध नहीं किया है। हालांकि, भारत लगातार शांति से मुद्दे का हल निकालने और बातचीत का पक्षधर रहा है।

रूस और अमेरिका दोनों के करीब भारत
ये युद्ध का युग नहीं है। पीएम मोदी पहले ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन से साफ कह चुके हैं कि समस्या का समाधान बातचीत से ही निकलेगा। भारत की रूस और अमेरिका से करीबी है। रूस जहां भारत का पुराना सहयोगी है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवारोव ने दिल्ली में कहा कि भारत और रूस का जो रिश्ता है वह किसी और देश का नहीं है। वहीं, अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडन भी मोदी में पूरा भरोसा जता चुके हैं। अमेरिका जी-20 में भारत का नेतृत्व का समर्थन कर चुका है।
युद्ध के बाद पहली बार भारत में मिले रूस-अमेरिका
24 फरवरी 2022 को यूक्रेन से युद्ध की शुरुआत हुई थी। इस युद्ध को एक साल से अधिक हो चुका है। ऐसा लग रहा है कि यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ जाएगा। भारत में जी-20 समिट के दौरान हिस्सा लेने आए रूस और अमेरिकी विदेश मंत्रियों ने 10 मिनट तक मुलाकात है। युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने मुलाकात की। ऐसे में कूटनीतिक रूप से यह भारत के बढ़ते कद के रूप में सामने आए हैं। मीटिंग में अमेरिका ने साफ तौर पर आखिरी दम तक यूक्रेन का साथ देगा। ससे पहले दोनों नेता जनवरी 2022 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मिले थे।

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