बिधनू करौली गांव के मानव मंदिर लवकुश आश्रम में कर्मकांड की आड़ में बाबा संतोष भदौरिया का कारोबार चमक रहा है। धनवान बनने के लिए संतोष भदौरिया ने बीते 30 वर्षों में कमाई के कई रास्ते चुने लेकिन, असफलता हाथ लगी। बाबा ने सनातन धर्म के नाम पर पूर्वज मुक्ति और प्रेत बाधाओं से मुक्ति का व्यापार शुरू किया। जिसने बाबा को कम समय में आसमान तक पहुंचा दिया। बाबा ने करौली गांव में शाम, दाम, दंड, भेद की नीति से करोड़ों की जमीन अर्जित कर करौली सरकार के नाम का साम्राज्य स्थापित कर लिया है। दो हजार की पुरानी स्कूटर पर चलने वाले संतोष सिंह भदौरिया दो करोड़ की कार पर सवार होकर बाबा करौली सरकार बन गए।
भाकियू का बड़ा नेता बनने की थी इच्छा
उन्नाव पवई गांव के संतोष सिंह भदौरिया करीब 1990 के दशक में भाकियू में राष्ट्रीय नेता बनने की इच्छा से शामिल हुए थे। उन्होंने किसानों की भीड़ लेकर कई धरने भी किए। यहां ज्यादा समय गुजरने के बाद भी जिला अध्यक्ष पद ही मिला। अधिवक्ताओं से भिड़ंत में पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ी तो राजनीति से मोह भंग हुआ। आर्थिक स्थिति खराब होने से नौबस्ता केंद्रांचल कालोनी में रहकर समाज से खुद को अलग कर लिया।
दूसरी पत्नी का प्लाट बेच शुरू किया जमीन व्यापार
संतोष भदौरिया ने रेलबाजार की रेनू सिंह से पहला विवाह किया था। आर्थिक संकट आने पर बाबा ने उन्हें भाग्य दोषी बताकर छोड़ दिया था। बाद में ममता तिवारी से विवाह कर लिया। ममता का कल्याणपुर में एक प्लाट बाबा ने बेचकर जमीन का व्यापार शुरू किया। ममता के भाइयों ने विरोध किया तो एक टेंपो खरीदकर दे दिया था।
आइपीएस ने बढ़ाया जमीन का कारोबार
शहर में रहे एक आइपीएस से बाबा के घरेलू संबंध हो गए थे। जिस पर बाबा विवादित जमीनें खरीदने और कब्जा करने लगा था। बाबा ने करौली गांव में एक भदौरिया परिवार की जमीन औने पौने में खरीदी थी। धीरे धीरे बाबा ने यहां करीब सौ बीघा जमीन बना ली। जहां बाबा ने आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा का अस्पताल बनाया। शहर में प्रचार के लिए सिविल लाइन पदम अपार्टमेंट में क्लीनिक खोला। इस व्यापार में भी कोई खास लाभ न होने पर वर्ष 2017 में बाबा ने पूर्वज मुक्ति केंद्र का रूप देकर खुद बाबा करौली सरकार बन गए।
रुपये देकर बनाए मरीज, वीडियो बनाकर किया प्रसारित
बाबा के करीबियों ने बताया कि व्यापार बढ़ाने को कुछ खास महिलाओं व पुरुषों को रुपये देकर मरीज बनाया। जो बाबा के बताए हुए तरीके से खुद पर भूत प्रेत और किसी पूर्वज की छाया होने का ढोंग करते थे। जिन्हें बाबा ओम शिव बैलेंस कर कहने के बाद त्रिशूल दिखकर सही कर देते हैं। वीडियो बनाकर इंटरनेट में प्रसारित किया जाता है। जिसे देख दूर-दूर से लोग आश्रम में आने लगे।