कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की संख्या 35 हजार के पार चली गई है। पिछले 24 घंटों में देशभर से 5,880 नए केस सामने आए। पॉजिटिविटी रेट लगातार बढ़ रहा है। राजधानी दिल्ली में संक्रमण दर 21% से ज्यादा हो गई है। हरियाणा समेत कई राज्यों में पब्लिक प्लेसेज पर मास्क कंपलसरी कर दिया गया है। इस बीच, सोमवार से अस्पतालों की तैयारियां परखने को राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल शुरू हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने एम्स (झज्जर) का दौरा किया। कोविड के मामलों में उछाल देखते हुए नई लहर की आशंका को बल मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक्सपर्ट का कहना है कि इम्यूनिटी कम होने से ऐसा हो सकता है। WHO की साउथ-ईस्ट एशिया की रीजनल डायरेक्टर डॉ पूनम खेत्रपाल के अनुसार, भारत को कोविड के मद्देनजर सर्विलांस बढ़ाने और वैक्सीनेशन तेज करने की जरूरत है।
कोरोना की नई लहर का खतरा, WHO एक्सपर्ट ने क्या कहा
- डॉ पूनम खेत्रपाल ने कहा कि लोगों में कोरोना से जुड़ी इम्यूनिटी कम हो गई है। इसके चलते नई लहर का खतरा मंडरा रहा है। कोविड केसेज में उछाल के बीच WHO की रीजनल डायरेक्टर का यह बयान बेहद अहम है। पिछले साल भी इसी वक्त ओमिक्रॉन वेव शुरू हुई थी।
- WHO एक्सपर्ट के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण हुआ है लेकिन वक्त के साथ इम्यूनिटी कम होने लगती है। ऐसे में बूस्टर डोज की जरूरत है। जिन लोगों को पहले से गंभीर बीमारी है, उन्हें प्रिकॉशन डोज जल्द से जल्द ले लेनी चाहिए।
- बच्चों और टीनएजर्स को कोविड का खतरा कम है लेकिन मोटापे के शिकार बच्चों को अलर्ट रहना चाहिए।
- डॉ सिंह ने कहा कि हमें वायरस को ट्रैक करने की क्षमता और अपने हेल्थ सिस्टम में खामियों को फौरन दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि कोविड से बचाव के लिए वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। यह बीमारी के गंभीर असर और मौत को रोकने में मदद करेगा।
देशभर में मॉक ड्रिल, दिल्ली-NCR में बढ़ा इन्फेक्शन
दिल्ली में 24 घंटों में कोविड-19 के 699 केस सामने आए हैं। एक दिन में चार मौतें सामने आई हैं। हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, इनमें से तीन मौतों का प्राथमिक कारण कोविड-19 नहीं था, टेस्ट करने पर संक्रमण पाया गया। संक्रमण दर 21.15% रही और एक्टिव केस 2,460 हैं। रविवार को गुड़गांव में 217, फरीदाबाद में 41 नोएडा में 62 और गाजियाबाद में 48 संक्रमित मिले।
कोरोना इन्फेक्शन को कमजोर करती है प्रिकॉशन डोज
सवाल : वर्तमान हालात में प्रिकॉशन डोज के मायने हैं
जवाब : प्रिकॉशन डोज का मतलब है कि एहतियात के तौर पर वैक्सीन की एक और डोज। जिन लोगों ने कोरोना के खिलाफ दो वैक्सीन की डोज ले रखी है, उनके लिए तीसरी डोज का विकल्प है। अमेरिका में इस पर स्टडी हुई है, जिसमें पाया गया है कि जिसने प्रिकॉशन डोज लिया था, उनमें संक्रमण के बाद इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती होने की नौबत कम आई, उनकी मौत कम हुई। जो लोग संक्रमण की वजह से गंभीर बीमार होने और इसकी वजह से होने वाली मौत के खतरे को कम करना चाहते हैं वो प्रिकॉशन डोज ले सकते हैं।
सवाल : लेकिन सरकार की इस पर क्या राय है?
जवाब : अभी तक सरकार ने इसको लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन सरकार ने तीसरी डोज का नाम प्रिकॉशन यानी एहतियाती डोज रखा है, जो लोग लेना चाहते हैं, उनके लिए विकल्प है।
सवाल : अभी जो वेरिएंट XBB.1.16 फैल रहा है, क्या इससे बचाव में कारगर है प्रिकॉशन डोज?
जवाब : यह कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि इस पर हमारे पास स्टडी नहीं है। क्योंकि इस संक्रमण में अब मरीजों में गंभीर बीमारी भी देखी जा रही है, मरीज वेंटिलेटर पर भी जा रहे हैं और रविवार को जारी मौत के आंकड़ों में एक की मौत की वजह कोरोना ही पाया गया है। इसलिए कहना मुश्किल है।
सवाल : प्रिकॉशन डोज किसके लिए फायदेमंद है?
जवाब: जो लोग हाई रिस्क मरीज हैं, उन्हें प्रिकॉशन डोज लेनी चाहिए, उनके लिए फायदेमंद है। जो लंबी बीमारी से पीड़ित हैं, चाहे कैंसर हो या हार्ट की बीमारी, ब्लड प्रेशर हो या डायबिटीज, किडनी, लिवर, सांस की बीमारी है उनके लिए कोरोना का भी वेरिएंट खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोगों को तीसरी डोज लेनी चाहिए।
सवाल : अभी प्रिकॉशन यानी तीसरी डोज की बात हो रही है, कल चौथी डोज की बात हो सकती है, आम लोग क्या करें?
जवाब : कोरोना के बारे में यह जान लें कि इसको लेकर सौ फीसदी आकलन करना संभव नहीं हो पाया है। शुरू से ही ऐसा रहा है। अब आने वाले समय में किस प्रकार का वैरिएंट होता है, कितना बदलाव होता है, यह आज के समय में कहना मुश्किल है। हो सकता है कि चौथी डोज की भी जरूरत पड़े और ऐसा हो सकता है कि हर साल इनफ्लुएंजा की तरह वैक्सीन लेनी पड़ जाए।