हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायिका को इस पर व्यापक नजरिए और सभी ग्रामीण एवं शहरी आबादी के विचारों, धर्म-संप्रदाय और पर्सनल लॉ को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना है। इसमें विवाह संबंधी रीति-रिवाज भी अहम हैं। केंद्र के इस जवाब के बाद विचारों के टकराव की स्थिति भी पैदा हो सकती है क्योंकि सरकार ने कहा है कि विवाह एक संस्था है जिससे संबंधित फैसले सक्षम विधायिका ही ले सकती है।
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायिका को इस पर व्यापक नजरिए और सभी ग्रामीण एवं शहरी आबादी के विचारों, धर्म-संप्रदाय और पर्सनल लॉ को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना है। इसमें विवाह संबंधी रीति-रिवाज भी अहम हैं। केंद्र के इस जवाब के बाद विचारों के टकराव की स्थिति भी पैदा हो सकती है क्योंकि सरकार ने कहा है कि विवाह एक संस्था है जिससे संबंधित फैसले सक्षम विधायिका ही ले सकती है।