नई दिल्ली: समलैंगिक विवाह के अधिकार से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एलियन की भी चर्चा हुई। दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इसे थोपे नहीं वरना सामाजिक तानाबाना तार-तार हो जाएगा। उनका तर्क था कि बदलाव स्वीकार करने के लिए समाज का तैयार होना भी जरूरी है और ऐसे में कोर्ट को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। द्विवेदी ने आगे कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक क्रांति के लिए भारत को प्रयोगशाला नहीं बनाना चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि समलैंगिक संबंध का कॉन्सेप्ट भारतीय संस्कृति के लिए कोई एलियन जैसी चीज नहीं है क्योंकि मंदिर की मूर्तियां सबूत हैं। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने संबंधी याचिकाओं को खारिज करने का फिर से अनुरोध किया। केंद्र ने कहा कि जीवनसाथी यानी पार्टनर चुनने के अधिकार का मतलब कानूनी तौर पर स्थापित प्रक्रिया से परे शादी का अधिकार बिल्कुल नहीं होता है।
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