मध्य प्रदेश के छतरपुर का बागेश्वर धाम। मंच सजा है। आसन पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बैठे हैं। सामने भक्तों का तांता लगा है। भक्त शास्त्री को बागेश्वर धाम सरकार/महाराज कहकर बुलाते हैं। शास्त्री किसी एक भक्त को अपने पास बुलाते हैं, सामने बिठाते हैं। एक कागज पर कुछ लिखते हैं। फिर सामने बैठे इंसान से पूछते हैं कि बताओ तुम्हारी क्या समस्या है। अगला सब कुछ बताता है। तब धीरेंद्र शास्त्री सबको वह कागज दिखाते हैं। उसपर समस्या और उसका निवारण लिखा हुआ है। जनता चकित रह जाती है, बागेश्वर बाबा कैसे किसी के ‘मन की बात’ जान गए। यह तो चमत्कार है! धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की प्रसिद्धि बढ़ती चली जाती है। टीवी पर नाम आता है तो कुछ प्रफेशनल माइंड रीडर्स आगे आते हैं। करन सिंह, सुहानी शाह जैसे… वो कहते हैं कि यह कोई ‘चमत्कार’ नहीं, बल्कि एक तकनीक है। इस तकनीक को न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) कहते हैं। NLP के बारे में कहां सिखाया-पढ़ाया जाता है? क्या कोई कोर्स होता है? डिग्री/सर्टिफिकेट भी मिलता है? आइए जानते हैं NLP से जुड़े सभी सवालों के जवाब
NLP तीन शब्दों- न्यूरो, लैंग्वेज और प्रोग्रामिंग का मेल है और तीनों को जोड़कर देखने से काफी सारी चीजें पता चलती हैं। हमारे दिमाग और शरीर की हालत शब्दों और नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन से बयान होती है। मनोस्थिति के आधार पर हमारा बात करने का तरीका और व्यवहार बदल जाता है। NLP में यह सिखाते हैं कि कैसे हाव-भाव और शब्दों के पीछे छिपी बात जानी जाए।