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TB समिट से निकलकर संपूर्णानंद विश्वविद्यालय की तरफ रवाना हुआ PM मोदी का काफिला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज (24 मार्च) काशी दौरे पर हैं। इस तूफानी दौरे में वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। सुबह तय कार्यक्रम के अनुसार वह बाबतपुर एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर के जरिए पुलिस लाइन पहुंचे और वहां से काफिले के साथ रुद्राक्ष सेंटर पहुंचे। यहां वन वर्ड टीबी समिट का शुभारंभ करने के बाद वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए रवाना हो गए। उनके दौरे से जुड़े लाइव अपडेट आप नीचे क्रमानुसार पढ़ सकते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी रुद्राक्ष कन्वर्सेशन सेंटर सिगरा की तरफ से निकले, मलदहिया चौराहा पर पीएम की गाड़ी हल्की धीमी हुई उन्होने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया। लोगों ने हर-हर महादेव के नारे लगाए। यहां पीएम का काफिला तेलियाबाग चौराहे से संपूर्णानंद विश्वविद्यालय की तरफ रवाना हुआ।

  • अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि टीबी हारेगा, भारत जीतेगा… आपने कहा कि टीबी हारेगा, दुनिया जीतेगी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक बार एक लैप्रेसी के उद्घाटन के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि मैं उद्घाटन के लिए नहीं जाऊंगा। मुझे तो खुशी तब होगी जब इस लैप्रेसी अस्पताल पर ताला लगाने के लिए बुलाया जाएगा।
  • पीएम ने कहा कि वर्ष 2001 में जब मुझे गुजरात के लोगों ने सेवा का अवसर दिया। तब मुझे लगा कि गांधी जी का एक सपना अधूरा रह गया है। हमने उस पर काम किया और लैप्रेसी अस्पताल पर ताला लगाया। ठीक उसी तरह टीबी को देश से मुक्त करने के लिए हमने बीड़ा उठाया है।
  • उन्होंने कहा कि इसमें जनभागीदारी बहुत आवश्यक है। टीबी के मरीजों में जागरूकता की कमी है। हमने उनको जागरूक करना होगा। काशी में बीते कुछ वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में बहुत विकास हुआ है। अब लोगों को इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई नहीं जाना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। जनऔषधि केंद्र से लोगों को सस्ती दवाएं मिल रही है। भारत हर देश के साथ टीबी के लिए कंधे से कांधा मिलाकर खड़ा है। मैं आपका आभारी हूं कि इस कार्यक्रम में आने के लिए आपने मुझे आमंत्रित किया।
  • पीएम मोदी ने कहा कि वन वर्ड टीबी समिट के जरिये भारत एक नए संकल्प पूरा कर रहा है। भारत का यह प्रयास टीबी के खिलाफ वैश्विक है। पिछले 9 वर्ष में भारत टीबी के लिए जनभागीदारी, इलाज के लिए नई रणनीति, नई तकनीक जैसे खेलो इंडिया, योग। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है जनभागीदारी। भारत में टीबी को स्थानीय भाषा में क्षय कहा जाता है।
  • उन्होंने कहा कि विदेश से आए अतिथियों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में टीबी मरीजों को लोग गोद ले रहे हैं। इसे भारत में निक्षय मित्र कहा जाता है। मैं आपका आभारी हूं कि आज आपने काशी के पांच लोगों को गोद लिया। टीबी मरीजों के पोषण के लिए वर्ष 2018 में डीबीटी के लिए 2000 करोड़ उनके बैंक खाते में भेजे गए। इससे करीब 75 लाख मरीजों को लाभ पहुंचा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोई भी इलाज से छूटे नहीं इसके लिए हमने नई रणनीति पर काम शुरू किया है। उन मरीजों को आयुष्मान कार्ड से जोड़ा है। लैब की संख्या बढ़ाई है। इस कड़ी में आज हम टीबी मुक्त पंचायत की घोषणा कर रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत अब तीन महीने ही मरीजों को दवा लेनी होगी। इससे मरीजों को सुविधा मिलेगी। मरीजों को ट्रैक करने के लिए आईसीएमआर के साथ मिलकर निक्षय पोर्टल बनाया गया है।
  • PM ने बताया कि इन प्रयासों के कारण आज भारत में मरीजों की संख्या कम हो रही है। कर्नाटक और जम्मू कश्मीर राज्य को टीबी से मुक्त करने के लिए पुरस्कार दिया गया है। भारत 2025 तक टीबी मुक्त करने का संकल्प लिया है। जबकि विश्व में इसका लक्ष्य 2030 तक है। कोविड काल से ही हम स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटे हैं। आज टीबी के लिए 80 प्रतिशत दवाएं भारत में बनती है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन के दौरान कहा कि काशी नगरी वे शाश्वत धारा है जो हजारों वर्षों से मानवता के प्रयासों और परिश्रम की साक्षी रही है। काशी इस बात की गवाही देती है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो जब सबका प्रयास होता है तो नया रास्ता भी निकलता है। मुझे विश्वास है कि टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ हमारे वैश्विक संकल्प को काशी एक नई ऊर्जा देगी।

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