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अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ने महिला साहित्यकारो को किया सम्मानित

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् भोपाल इकाई का अमृत शक्ति सम्मान व्याख्यान पुस्तक समीक्षा एवं लोग भाषा रचना पाठ कार्यक्रम दिनांक 2 अप्रैल को नव संवत्सर 2080 की मांगलिक बेला में विश्व संवाद केंद्र शिवाजी नगर में संपन्न हुआ उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुश्री प्रियंका शक्ति ठाकुर सुविख्यात निर्देशिका अध्यक्ष डॉ नुसरत मेहदी निदेशक उर्दू अकादमी एवं अध्यक्ष अखिल भारतीय भोपाल इकाई विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  डॉ बिनय राजाराम एवं सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ साधना बलवटे उपस्थित रहीं।
मातृशक्ति श्रीमती सर्वप्रथम मनोरमा पंत और डॉ राजिया हामिद जी को अमृत शक्ति सम्मान से व  नेपथ्य की शक्ति सम्मान से डॉ विनीता चौबे को सम्मानित किया गया।
डॉ साधना बलवटे को विश्व हिन्दी सम्मेलन फिजी में भारत का प्रतिनिधित्व करने पर भोपाल इकाई ने सम्मानित किया।
साथ ही।
इस अवसर पर अभासाप भोपाल इकाई की प्रांतीय बैठक, ग्वालियर में परिषद् ने भोपाल इकाई के निम्नलिखित कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण दायित्व सौपें जाने पर सम्मानित किया ।
ममता बाजपेई
प्रांतीय उपाध्यक्ष
सुनीता यादव
प्रांतीय मंत्री
मॉडवी सिंह
संभाग संरक्षक
राकेश सिंह
सहप्रांत मीडिया प्रभारी
प्रांत युवा आयाम सह प्रभारी
पुरु शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर नुसरत मेहदी ने कहा
“जब – जब भाषा, संस्कारों व परम्पराओं की नब्ज कमजोर होती प्रतीत होती है अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इनकी नब्ज को टटोलकर उसे पुनर्जीवित करने का कार्य करती है।”
मुख्य अतिथि प्रियंका शक्ति ठाकुर ने अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि “अखिल भारतीय साहित्य परिषद भोपाल इकाई अमृत सम्मान की परम्परा के निर्वहन का उत्कृष्ट कार्य कर रही है। साथ ही लोक भाषा पर आधारित कार्यक्रम का आयोजन भी सराहनीय है।”
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ  राजाराम ने कहा कि “हमारे भारत में ही छह उप ऋतुएँ आती हैं। शरीर को नवरात्रि में अनुकूलन करने के लिए तैयार किया जाता है। चौदह दिन का कोरोंटाईन भारतीय परम्परा में बहुत पहले से ही किया जाता है।”
सारस्वत अतिथि राष्ट्रीय डॉ साधना बलवटे ने अपने उद्बोधन में कहा कि “प्रकृति की पूजा हमारे संस्कारों में होनी चाहिए।
जीवन के सारे तत्व प्रकृति के देवता सूर्य चंद्रमा, वायु, अग्नि आदि लोक में हमेशा पूजे जाते हैं।
“परितप्त लंकेश्वरी” पुस्तक की समीक्षा करते हुए उन्होंने मंदोदरी के मनोभावों को बहुत बारिकी से विश्लेषण किया।”
कार्यक्रम में लोक भाषाओं की रचनाओं का पाठ हुआ जिसमें
बघेली में गीतकार संदीप शर्मा ने रचना पढ़ी
दादू करिन निहाल अबा पुनि कहतय जाब,
घिनही इनखर चाल अबा पुनि कहतय जाब।
 बुंदैली में अशोक गौतम घायल ने रचना पढ़ी
मैया वो दिये ज्वार तेरे नाम के
श्रीमती श्यामा गुप्ता ने पढ़ा
खूबई ऊन्ना पैरे मुन्ना जा जाड़े में
 मालवी लोकभाषा में  श्रीमती शालिनी व्यास ने गीत सुनाया
नव वर्ष की नयी उमंग हैं दादा ढोल बजाईं दो।
और निमाड़ी लोकभाषा में
अशोक दुबे अशोक ने  रचना पढ़ी
खातून होय पकवान  तो
चल जो आज निमाड़
कार्यक्रम में  संचालन नीता सक्सेना स्वागत वक्तव्य पुरूषोत्तम तिवारी आभार  ममता बाजपेई ने व्यक्त किया।  महामंत्री सुनीता यादव उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम तिवारी अनिता सिंह चौहान शीला मिश्रा अशोक दुबे पुरु शर्मा राकेश सिंह  कमलेश गुल राजेश विश्वकर्मा चरणजीत सिंह कुकरेजा बिहारीलालसोनी डॉ गौरीशंकर गौरीश लेखिका संघ अध्यक्ष डॉ कुंकुम गुप्ता अशोक घमेनिया देवेश देव एवं सदस्यगण उपस्थित थे।

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