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नमामि गंगे परियोजना के तहत जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु विशेष अभियान

नमामि गंगे परियोजना के तहत जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु विशेष अभियान
नमामि गंगे परियोजना के तहत जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु विशेष अभियान

उमरिया: जिले के सभी नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जल स्रोतों, नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी एवं अन्य जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए 5 जून से 15 जून तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि यह अभियान जन सहयोग से जिले के हर गांव में संचालित होगा।
इस अभियान के तहत निम्नलिखित कार्य किए जाएंगे:
1. जल स्रोतों की सफाई और गाद निकालना: जल स्रोतों की नियमित सफाई और गाद निकालने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
2. वृक्षारोपण: तालाबों की मेढ़ों पर वृक्षारोपण किया जाएगा जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
3. अवरोध और अतिक्रमण हटाना: कैचमेंट एरिया में अवरोधों और अतिक्रमण को हटाने के प्रयास किए जाएंगे।
4. भू अभिलेख में दर्ज: जिन जल संरचनाओं को अभी तक राजस्व भू अभिलेख में दर्ज नहीं किया गया है, उन्हें इस अभियान के माध्यम से दर्ज किया जाएगा।
नगरीय क्षेत्रों में अमृत योजना के तहत तालाबों के सौंदर्यीकरण के साथ ही उनमें आने वाले गंदे पानी का उपचार किया जाएगा और फिर उसे तालाब में छोड़ा जाएगा।
प्रत्येक जल संरचना के लिए पृथक से नोडल अधिकारी एवं विभागों को जवाबदारी सौंपी जाएगी। कार्य की प्रगति को ट्रैक करने के लिए काम शुरू होने, काम के मध्य में तथा कार्य के पश्चात के फोटोग्राफ एवं वीडियो तैयार किए जाएंगे। ऐतिहासिक महत्व की जल संरचनाओं के महत्व को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
जीवनदायिनी नदियों को पुनर्जीवित करने, उनके घाटों की सफाई और मरम्मत का कार्य भी इस अभियान के अंतर्गत किया जाएगा। प्रतिदिन किए जाने वाले हर कार्य की दैनिक रिपोर्टिंग की जाएगी, जिसके लिए शहरी क्षेत्रों के लिए परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीईओ जिला पंचायत को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
इस अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक और धार्मिक संगठनों, व्यापारिक संगठनों, जन अभियान परिषद, एनआरएलएम सहित अन्य संगठनों का सहयोग अपेक्षित है। इस अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, जिससे जिले में जल की समस्या को दूर किया जा सके और जल स्रोतों का सतत विकास सुनिश्चित हो।

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