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टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया ने लगाया जीत का छक्का, 13 साल में दूसरी हैट्रिक

केपटाउन: आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने एक बार फिर से अपनी बादशाहत को साबित की है। टी20 विश्व कप 2023 के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत साउथ अफ्रीका के साथ थी जहां उसने 19 रन से मुकाबले को जीतकर छठी बार ट्रॉफी अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की टीम सातवीं बार फाइनल में पहुंची थी। टूर्नामेंट के बीते 13 सालों में यह दूसरी बार है जब ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अपनी हैट्रिक पूरी की है।

ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीम 2018, 2020 और अब 2023 में लगातार चैंपियन बनी है। इससे पहले वह 2010, 2012 और 2014 में भी लगातार तीन बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। ऑस्ट्रेलिया की टीम 2016 में भी टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी, जहां उसका सामना वेस्टइंडीज से हुआ था लेकिन इस फाइनल में उसे 8 विकेट से हार मिली थी। 2016 का टी20 विश्व कप भारत में खेला गया था।

ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया की टीम 2016 टी20 विश्व कप के फाइनल में वेस्टइंडीज से नहीं हारती तो शायद वह लगातार सातवीं बार चैंपियन बनने वाली टीम बन जाती। इसके बाद से टीम ने जबरदस्त वापसी और लगातार तीसरी बार विजेता बनी है।

ऑस्ट्रेलिया की जीत में चमकी बेथ मूनी

टी20 विश्व कप में जीत छक्का जड़ने में ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूनी का योगदान काफी अहम रहा। फाइनल मैच में उन्होंने अपनी टीम के लिए शानदार 74 रनों की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 54 गेंद का सामना किया जिसमें उन्होंने 9 चौके और एक छक्का भी लगाया। मूनी की इस शानदार प्रदर्शन के कारण ही ऑस्ट्रेलियाई टीम निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 156 रन के स्कोर तक पहुंच पाई थी। मूनी ने अगर टीम के लिए अर्धशतकीय पारी नहीं खेली होती तो शायद ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजों के लिए लक्ष्य का बचाव करना काफी मुश्किल हो सकता था।

ऑस्ट्रेलिया के द्वारा दिए गए 157 रनों के जवाब में साउथ अफ्रीकी टीम ने भी जोरदार प्रयास किया लेकिन वह 20 ओवर में सिर्फ 137 रन ही बना सकी।

ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों ने बरपाया कहर

टूर्नामेंट में साउथ अफ्रीकी खिलाड़ी जिस लय में खेल रहे थे उसे रोकना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बड़ी चुनौती थी लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की सभी गेंदबाजों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। हालांकि मैच में मेगन शट, एश्ले गार्डनर, डार्सी ब्राउन और जेस जोनासेन को ही सफलता मिली लेकिन टीम की किसी गेंदबाज ने 25 से अधिक रन खर्च नहीं किए।

कप्तान मेग लैनिंग की चतुराई भरी इस कप्तानी के कारण उन्होंने गेंदबाजों का इस्तेमाल बहुत की सूझबूझ के साथ की जिसके कारण ऑस्ट्रेलियाई टीम चैंपियन बन पाई।

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