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कोरोना की खतरनाक हो रही रफ्तार, टेंशन की कितनी बात है? जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट

नई दिल्ली : देश में कोरोना ने खतरे की घंटी बजा दी है। कोरोना संक्रमण के मामले लगातार आठवें सप्ताह में भी बढ़ रहे हैं। 200 से अधिक दिनों में पहली बार डेली कोरोना केस की संख्या 6,000 को पार कर चुकी है। इस बीच, केंद्र ने शुक्रवार को राज्यों से कहा कि वे इन्फ्लूएंजा, गंभीर सांस का संक्रमण जैसी बीमारियों के टेस्ट और मॉनिटरिंग के साथ ही उभरते हुए कोविड हॉटस्पॉट की पहचान करें। देश में पिछले 24 घंटे में कोविड संक्रमण के 6,050 नए मामले दर्ज किए। यह पिछले साल 15 सितंबर के बाद से सबसे अधिक डेली केस हैं।

10 दिन में तेजी से बढ़ा संक्रमण

पिछले 10 दिनों में संक्रमण के बढ़ने की दर में तेजी से वृद्धि हुई है, वर्तमान में लगभग सात दिनों में मामले दोगुने हो रहे हैं। इससे पहले 10 दिन में कोरोना के मामले दोगुने हो रहे थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ स्थिति का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 23 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान में राष्ट्रीय औसत से कम प्रति मिलियन टेस्ट हो रहे हैं। उन्होंने कोविड टेस्ट में आरटी-पीसीआर की हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पॉजिटिविटी रेट दे रही टेंशन

  • पिछले 24 घंटों में कोविड से 13 और लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। पिछले सात दिनों में 59 मौतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले सात दिनों की अवधि में 38 थीं।
  • एक्टिव मामलों की संख्या 30,000 को पार करने की आशंका है, जो एक सप्ताह पहले 16,300 थी।
  • पिछले 24 घंटों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 1.78 लाख कोविड-19 टेस्ट हुए। पॉजिटिविटी रेट 3.39% दर्ज की गई।
  • 7 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में औसत दैनिक मामले बढ़कर 4,188 हो गए, जो 17 मार्च को समाप्त सप्ताह में 571 थे।

केरल महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहे मामले

केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन राज्यों के 10 या इससे अधिक जिलों में पॉजिटिविटी रेट 10% से अधिक है। इसके अलावा कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा में 5 या इससे अधिक जिले में पॉजिटिविटी रेट 5% से अधिक दर्ज की जा रही है।
कौन से वेरिएंट से बढ़ रहे केस

कोरोना के मामले बढ़ने के पीछे अभी भी ओमिक्रोन और उसके सब-वेरिएंट ही जिम्मेदार हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कोविड के ओमिक्रॉन एक सबवेरिएंट (VOI), XBB.1.5 पर बारीकी से नजर रख रहा है। इसके अलावा छह अन्य सबवेरिएंट (BQ.1, BA.2.75, CH.1.1, XBB, XBF और XBB.1.16) की भी मॉनिटरिंग की जा रही है। केंद्र की तरफ से कहा गया है कि XBB.1.16 का प्रसार फरवरी में 21.6% से बढ़कर मार्च में 35.8% हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी तक अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु दर में वृद्धि का कोई सबूत नहीं मिला है।

देशभर के अस्पतालों में होगी मॉकड्रिल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने समीक्षा बैठक में राज्यों से कोविड उपयुक्त व्यवहार के पालन के संबंध में जन जागरूकता अभियान बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी राज्य स्वास्थ्य मंत्रियों से अनुरोध किया कि वे व्यक्तिगत रूप से सभी लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे की तैयारियों की निगरानी और समीक्षा करें। इसमें अस्पतालों में पर्याप्त बेड की उपलब्धता शामिल है। साथ ही दवाओं का आवश्यक स्टॉक सुनिश्चित करने की बात कही है। राज्यों को कोविड इंडिया पोर्टल पर अपने कोविड डेटा को नियमित रूप से अपडेट करने के लिए भी कहा गया है। अगले सप्ताह, सोमवार और मंगलवार को, सार्वजनिक और निजी दोनों अस्पतालों की आपातकालीन तैयारियों का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल की योजना बनाई गई है।

टेंशन की कितनी बात है?

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों का कहना है कि अभी कोरोना के बढ़ते मामलों से घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, एक्स्पर्ट्स लोगों को बचाव के उपायों का पालन करने पर जोर दे रहे हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से जुड़ी कम्यूनिटी मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. नंदिनी शर्मा के अनुसार इस बार अभी तक ऐसा कुछ नहीं मिला है जो चिंताजनक लगे। उन्होंने कहा कि टेस्ट में नए मरीज सामने आ रहे हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार इस बार H3N2 की वजह से लोगों की लंबे समय तक खांसी का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से जब लोग टेस्ट करा रहे हैं तो कोविड के केस भी आ रहे हैं। डॉक्टर नंदिनी ने कहा कि जैसे कोविड-19 पहले आया था, अब वैसा नहीं रह गया है। कोविड-19 वायरस में भी चेंज हुए हैं। हालांकि, लोगों के शरीर में अभी भी इसके खिलाफ इम्यूनिटी है।

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