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तालियों की गूंज, चेहरे पर मुस्कान, आंखों में प्यार…तुर्किये से NDRF की यूं विदाई, क्या एर्दोगान को आएगी अक्ल?

अंकारा: तुर्किये में आए भीषण भूकंप में मददगार बन पहुंची भारत की एनडीआरएफ का ऑपरेशन दोस्त पूरा हो चुका है। जब भारतीय टीम वहां से रवाना होने के लिए एयरपोर्ट पहुंची तो उनको भव्य विदाई देने के लिए सैकड़ों स्थानीय लोग जमा थे। इन लोगों ने चेहरे पर मुस्कान के साथ तालियां बजाकर भारतीय टीम को धन्यवाद दिया। कुछ ऐसा ही नजारा तुर्किये के इस्केंडरन में भारतीय सेना के मेडिकल टीम की विदाई के दौरान भी देखने को मिला। इस दौरान टर्किश लोगों ने भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ के लिए जमकर तालियां बजाई। तुर्किये और भारत के संबंधों में इन दोनों घटनाओं को मील का पत्थर माना जा रहा है।

अपना साजोसामान लेकर खुद पहुंची थी भारत की टीम

भूकंप के बाद मदद करने पहुंची एनडीआरएफ और सेना के फील्ड हॉस्पिटल की टीम ने सैकड़ों टर्किश लोगों की न केवल जान बचाई बल्कि हजारों की संख्या में घायल लोगों का इलाज भी किया। बड़ी बात यह रही कि इस मदद के लिए भारतीय टीम ने वहां की सरकार पर निर्भर न होते हुए सारा साजोसामान खुद लेकर गई थी। रही बात मेडिकल सप्लाई की तो उसे भारत से लगभग रोजाना विमानों के जरिए तुर्किये पहुंचाया गया। ऐसे में जब भारतीय एनडीआरएफ की टीम तुर्किये से वापस आने के लिए एयरपोर्ट पहुंची तो वहां की आम जनता ने ताली बजाकर धन्यवाद दिया। भारतीय सेना के मेडिकल टीम का भी टर्किश लोगों ने ऐसे ही विदाई दी। अब इस रोमांचक घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

तुर्किये और भारत के रिश्ते सामान्य नहीं

तुर्किये और भारत के संबंध शुरू से ही अच्छे नहीं रहे हैं। तुर्किये ने हमेशा ही भारत की तुलना में पाकिस्तान को ज्यादा अहमियत दी है। इस कारण भारत को भी तुर्किये को लेकर अपनी विदेश नीति बदलनी पड़ी है। तुर्किये में रेचेप तैयप एर्दोगन खुद को इस्लामिक देशों का खलीफा बनाना चाहते हैं। उनकी महत्वकांक्षा सऊदी अरब को मुस्लिम देशों के नेता के पद से हटाकर तुर्किये को बैठाने की है। ऐसे में उनको पाकिस्तान और मलेशिया से बड़ा कोई दोस्त दिखाई नहीं देता है। तुर्किये ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का पक्ष लिया है। ऐसे में हर बार भारत को कड़ी प्रतिक्रिया देनी पड़ी है।

मदद के वक्त भारत ही आया काम

भूकंप से बेहाल तुर्किये को जब मदद की दरकार पड़ी तो भारत ने सबसे पहले प्रतिक्रिया दी और एनडीआरएफ को राहत और बचाव कार्य के लिए भेजा। इतना ही नहीं, भारत सरकार ने 24 घंटे के अंदर सेना के फील्ड अस्पताल को भी तुर्किये में स्थापित किया, जहां 10 से ज्यादा डॉक्टरों और 99 मेडिकल स्टॉफ की तैनाती की गई। इन लोगों की सहायता करने में तुर्किये की सरकार को परेशानी से बचाने के लिए भारत ने हवाई जहाज से ट्रक, टेंट, एक्ट्रीम कोल्ड वेदर सूट, स्लीपिंग बैग, मेडिकल उपकरण, बेड और दवाइयां भी भेजी। भारतीय टीम ने घायल नागरिकों के सैकड़ों छोटे-बड़े ऑपरेशन किए।

पाकिस्तान ने तुर्किये के लिए क्या किया

पाकिस्तान खुद ही कंगाली के हालात से गुजर रहा है। भूकंप आते ही पाकिस्तान ने भी तुर्किये को राहत समाग्री से भरे तीन विमान भेजे, लेकिन वे ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुए। मीडिया रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया गया कि पाकिस्तान में आई बाढ़ के समय तुर्किये ने जो राहत सामग्री भेजी थी, शहबाज शरीफ सरकार ने उसे ही तुर्किये को भूकंप सहायता के नाम पर वापस भेज दिया था। पाकिस्तान ने तुर्किये को 10 मिलियन डॉलर की मदद का भी ऐलान किया था, हालांकि तब इसे लेकर काफी खिल्ली उड़ाई गई थी। दरअसल, पाकिस्तान खुद ही कौड़ी-कौड़ी के लिए मोहताज है, ऐसे में वह तुर्किये के प्रति अपनापन दिखाने के लिए सिर्फ ऐलान कर रहा है। हाल में ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुर्किये की यात्रा भी की है।

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