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डरने के बजाय मैथ्स में मज़ा लें बच्चे… ऐसा पढ़ाई का पैटर्न चाहती है सरकार

नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा के लिए तैयार किए गए नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) ड्राफ्ट में गणित की पढ़ाई में बदलावों को लेकर कई अहम सुझाव दिए गए हैं। जिन छात्रों की गणित विषय में रुचि नहीं होती या फिर जो छात्र गणित से डरते हैं, उनकी सोच में बदलाव लाने के लिए गणित को कला, खेल और भाषा के साथ जोड़ने की सिफारिश की गई है। इस प्रयोग से स्कूली छात्रों के लिए इस विषय को अधिक रचनात्मक बनाने की बात कही गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कहा गया है कि गणित और गणितीय सोच देश के भविष्य के लिए बहुत अहम है। ऐसे में गणित की शिक्षा में जरूरी बदलाव किए जाने की जरूरत है। शिक्षकों को भी गणित पढ़ाने के तरीके में नए प्रयोगों को महत्व देना होगा। साथ ही गणित विषय में प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट वर्क को भी अहमियत मिलेगी। गणित में लिखित परीक्षा को 80 प्रतिशत और प्रैक्टिकल परीक्षा को 20 प्रतिशत वेटेज दिए जाने की सिफारिश की गई है।

नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क में कहा गया है कि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही रोचक तरीके से गणित पढ़ाया जाना चाहिए। इससे जब बच्चा बड़ी कक्षा में जाएगा तो यह रुचि बरकरार रहेगी। गणित को कला के साथ जोड़ा जा सकता है, जैसे रंगोली पैटर्न के जरिए बच्चे को काफी कुछ सिखाया जा सकता है। रंगोली बनाने में गणित का कैसे प्रयोग किया जाता है, इसके बारे में बच्चों को बताया जा सकता है। पेंटिंग में कलर पैटर्न की जानकारी भी बच्चों को दी जाए। इसी तरह से गणित को खेल से जोड़ा जा सकता है। स्पोर्ट्स में आंकड़ों का काफी महत्व होता है। ऐसे में जब बच्चों को गणित के फॉर्म्युले के बारे में सिखाया जाए तो स्पोर्ट्स में आंकड़ों के प्रयोग के बारे में बताया जा सकता है। NCF कहता है कि गणित की शिक्षा में नई तकनीकों का प्रयोग जरूरी है ताकि इस विषय में छात्रों की रुचि बढ़ाई जा सके।
 

बाकी विषयों में प्रोजेक्ट वर्क तो गणित में क्यों नहीं

NCF कहता है कि मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव करना होगा। जिस तरह से दूसरे विषयों में प्रैक्टिकल या प्रोजेक्ट वर्क का प्रावधान है, उसी तरह से गणित में भी प्रोजेक्ट वर्क होना चाहिए। छात्रों को तरह-तरह के प्रोजेक्ट करने को दिए जा सकते हैं, जिसमें गणित का प्रयोग हो। राष्ट्रीय संचालन समिति ने समेटिव और फॉर्मेटिव दोनों तरह के असेसमेंट का सुझाव दिया है। जूनियर स्तर पर हर महीने असेसमेंट का सुझाव दिया गया है, जबकि माध्यमिक स्तर के लिए त्रैमासिक मूल्यांकन (मौखिक, लिखित, ऐक्टिविटीज, प्रोजेक्ट) का फॉर्म्युला दिया गया है। लिखित को 80 प्रतिशत और प्रायोगिक/परियोजनाओं को 20 प्रतिशत की वेटेज देने की बात कही गई है।

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