रिश्तों में दरार भरने की गुंजाइश न हो तो शादी खत्म कर सकता है सुप्रीम कोर्ट, वेटिंग पीरियड भी जरूरी नहीं
बेंच ने 29 सितंबर, 2022 को पांच याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिनमें 2014 में शिल्पा शैलेश की ओर से दायर मुख्य याचिका भी शामिल है। अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि सामाजिक परिवर्तन में ‘थोड़ा समय’ लगता है और कभी-कभी कानून लाना आसान होता है, लेकिन समाज को इसके साथ बदलने के लिए राजी करना मुश्किल होता है।
इसी महीने दी थी शादी जोड़ने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने एक टेक एक्सपर्ट कपल को तलाक की अनुमति दी थी। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने वह फैसला दिया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने दंपति से तलाक लेने के बजाय शादी का दूसरा मौका देने के बारे में सोचने को कहा था और यह भी कहा था कि बेंगलुरु ऐसी जगह नहीं है, जहां इतनी बार तलाक होते हैं। उनके बीच समझौते की संभावना तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में भेजा गया था। हालांकि, बाद में पीठ ने कहा, इन परिस्थितियों में हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हैं और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री द्वारा पार्टियों के बीच विवाह को भंग करते हैं। (एजेंसी इनपुट्स सहित)