(भोपाल) आर्डनेंस फैक्ट्री में तीन धमाके, भटटी में लगी आग
बाल-बाल बचे कर्मचारी, रात्रिपाली में हुआ हादसा
भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के जबलपुर शहर स्थित आर्डनेंस फैक्ट्री (ओएफजे, पूर्व नाम जीआइएफ) में लगातार तीन धमाके होने से क्षेत्र में दहशत फैल गई। ये धमाके सेंट्रल आर्डनेंस डिपो के कलपुर्जे को गलाने वाली भट्टी में अचानक आग लगने के कारण हुए। इस दौरान रात्रिपाली में कार्य करने वाले कर्मचारी दूर हट गए। जिससे हादसा टल गया। मौके पर फायर ब्रिगेड देर से पहुंची, हालांकि तब तक कर्मचारी ही मोर्चा संभाल रहे थे। ओएफजे प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जिस वक्त कलपुर्जे बनाने वाली भट्टी पर धमाका हुआ उस समय करीब 25 से 30 कर्मचारी वहां मौजूद थे, धमाकों का अंदेशा देख पास कर्मचारी दूर गए और फाउंड्री सेक्शन से बाहर चले गए। लेकिन एक कर्मचारी जो भट्टी पर ऊपर की ओर था वह फंस गया, हालांकि सूझबूझ से पहले उसे उतारा गया और फिर सब बाहर निकल गए। करीब 30 कर्मचारी फाउंड्री सेक्शन की भट्टी में रोज की तरह सेंट्रल आर्डनेंस डिपो के कलपुर्जे गला रहे थे। इन्हें गलाने के बाद यह स्क्रैप इंगट बन जाता है और इसे वापस सेंट्रल आर्डनेंस डिपो को सौंप दिया जाता है। तभी भट्टी साइड से लीक हो गई, आमपौर पर ऊपर की यह लीक होती है लेकिन मंगलवार को यह साइड से लीक होकर आग के गोले बनकर ऊपर की ओर आग भड़की। पहले एक छोटा धमाका हुआ इसके बाद दो तेज धमाके हुए जिसकी गूंज आसपास एक से डेढ़ किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। ओएफजे में 24 घंटे के कार्य को चार शिफ्ट में बांटा गया है। जिस वक्त धमाका हुआ उस समय 30 के लगभग कर्मचारी जो कि दूसरी शिफ्ट सुबह 11 से शाम सात बजे के कार्य कर रहे थे। ओएफजे के पास स्क्रैप गलाने के लिए विभिन्न आकार की 10 भट्टियां है। जिस भट्टी में लीकेज के बाद धमाका हुआ वह करीब 3 टन की थी। यह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इससे ओएफजे को करीब 25 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। ओएफजे के पास दो फायर ब्रिग्रेड वाहन हैं, लेकिन आज जिस वक्त हादसा हुआ उस समय वाहन का ड्राइवर ही मौजूद नहीं था। बताया जाता की उसे एक अन्य एमटी सेक्शन ले लेता है। यही कारण है कि भट्टी तक पहुंचने में दमकल वाहन को देरी हो गई। तब तक कर्मचारी ही अपनी सूझबूझ से आग पर काबू पाने की कोशिश करते रहे और ड्राइवर के अभाव में एक अन्य कर्मचारी वाहन चलाकर पहुंचा। फैक्ट्री के पास दमकल वाहन कार्य करने हेतु सिर्फ सात क्रू मेंबर हैं जबकि तीन अलग-अलग पाली के लिए होने 24 चाहिए। उसमें भी एक सरकारी कर्मचारी जबकि शेष छह प्राइवेट वर्कर हैं। इस बारे में ओएफजे महाप्रबंधक सुकांत सरकार का कहना है कि कलपुर्जों को गलाने के दौरान भट्टी में कभी-कभार हल्के धमाके हो जाते है, लेकिन आज का धमाका बड़ा था। हालांकि जल्द ही हमने इस पर काबू पा लिया और कोई इंजुरी नहीं हुई, सेक्शन में कार्य के दौरान कर्मचारी एक विशेष पोशाक में कार्य करते है, जिसके कारण वे हादसों के दौरान सुरक्षित रहते हैं।