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कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा हुई प्रारंभ

गालबेश्वर महादेव मंदिर गालव नगर 24 बीघा बहोड़ापुर में श्रीमद्भागवत कथा कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हो गई परीक्षित विनोद भार्गव प्रीति भार्गव श्रीमद् भागवत कथा की पोती को लेकर के आगे चल रहे थे और माता बहने 251 कालशो को लेकर पीछे चल रही थी कलश यात्रा कुशवाहा जी का मंदिर बिजलीघर विनय नगर से कथा स्थल तक पहुंची जगह जगह भक्तों ने श्रीमद् भागवत कथा का और आचार्य जी का सम्मान भी किया उसके बाद श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ हुई सुप्रसिद्ध भागवत आचार्य पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के समस्त इच्छाओं को पूरा करती है. यह कल्पवृक्ष के समान है. इसके लिए मनुष्य को निर्मल भाव से कथा सुनने और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए. मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं. लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है. ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है कथा व्यास ने कहा कि, भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है. भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है. भागवत की महिमा सुनाते हुए महात्मा जी ने कहा कि, एक बार नारद जी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई. नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे. युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है. यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है. यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे. लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए. बूढे हो गए. आप इन्हें जगा दीजिए. इसके बाद देवर्षि नारद जी ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया. लेकिन वह नहीं जागे. नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी. ज्ञान, वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा. मुनियों के बताने पर नारद जी ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया. मुनि कथा व्यास और नारद जी मुख्य परीक्षित बने. इससे ज्ञान और वैराग्य प्रथम दिवस की ही कथा सुनकर जाग गए वही कार्यक्रम में अशोक गुप्ता जी मौजूद रहे

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