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‘बच्चों को स्कूल भेजें नहीं तो…’ क्लासरूम खाली हुए तो धमकाने पर उतरा उत्तर कोरिया, कारण क्या है?

प्योंगयांग: उत्तर कोरिया भले ही तानाशाही वाला देश हो सकता है। इसके बावजूद वह बच्चों की स्कूली शिक्षा को बहुत महत्व देता है। यही कारण है कि उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने उन पैरेंट्स को धमकी दी है, जो अपने बच्चों को खेतों में काम पर लगाते हैं। अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे पैरेंट्स अपने बच्चों को तुरंत स्कूल भेजें, नहीं तो उन्होंने कम से कम सजा के तौर पर सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, उत्तर कोरिया में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 10 दिन बाद भी ज्यादातर क्लासरूम खाली हैं। अधिकतर गरीब बच्चे अभी तक अपनी कक्षाओं को ज्वाइन नहीं कर सके हैं क्योंकि उत्तर कोरिया में यह खेती का मौसम है। ये बच्चे खेतो में अपने माता-पिता के साथ काम कर रहे हैं।

बच्चों के पैरेंट्स को भेजा गया नोटिस

रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर कोरिया के अधिकारियों ने बच्चों को स्कूल न भेजने वाले माता-पिता को नोटिस भेजा है। इमसें धमकी दी गई है कि अगर वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं तो उन्हें पूछताछ या सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाएगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आज, काउंटी के शिक्षा विभाग ने उन माता-पिता को नोटिस भेजा है जिन्होंने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा है… चेतावनी दी है कि अगर वे उपस्थित नहीं होते हैं तो वे पार्टी समितियों और उनके माता-पिता के कार्यस्थलों को सूचित करेंगे। जब कक्षा में उपस्थिति दर कम होती है, तो क्लास टीचर से पूछताछ की जाएगी।

बच्चे स्कूल क्यों नहीं जा रहे

सूत्रों ने बताया कि बच्चों के स्कूल नहीं आने का कारण यह है कि उन्हें अपने माता-पिता की मदद करनी पड़ती है, जो पहाड़ों में खेती के लिए अपने छोटे खेतों को तैयार करने में व्यस्त हैं, क्योंकि रोपण का मौसम शुरू हो रहा है। उत्तर कोरिया में खेतों में काम करने वाले छोटे बच्चों को वॉलंटियर कहा जाता है। इन बच्चों को अक्सर निजी भूखंडों में छोटे-मोटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि ये बच्चे स्वेच्छा से खुद को खेती या खनन गतिविधियों में शामिल होते हैं।

उत्तर कोरिया पर बालश्रम के लगे हैं आरोप

नाम न छापने की शर्त पर उत्तर कोरिया के पूर्वोत्तर प्रांत नॉर्थ हैमयोंग के होरयोंग के एक निवासी ने कहा कि सच्चाई यह है कि अधिकारी उन्हें मजबूर कर रहे हैं। उसने कहा कि कोई बच्चा नहीं है जो स्वेच्छा से ऐसी जगह पर जाना चाहे। कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी का दावा है कि अपनी युवावस्था में ज्ञान और साहस वाले सैकड़ों बच्चों ने राज्य के लिए शारीरिक श्रम करने का विकल्प चुना है। वहीं, दुनियाभर के मानवाधिकार समूहों ने हमेशा उत्तर कोरिया पर जबरन बाल श्रम का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

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