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शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं

शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं
हार्ट, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग में रामबाण
नई दिल्ली । शालपर्णी का पौधा किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। यह औषधि हृदय रोगियों के लिए वरदान मानी जाती है। यह एक नहीं बल्कि अनेक बीमारियों को शरीर से छूमंतर कर देती है। शालपर्णी बवासीर, कब्ज, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग जैसी तमाम बीमारियों में बहुत उपयोगी और फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार यह औषधि बेहद महत्वपूर्ण और गुणकारी है। यह बवासीर, कब्ज, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द और चर्म रोग जैसी तमाम समस्याओं में उपयोगी है। विशेषज्ञ की मानें तो शालपर्णी का आयुर्वेद में बहुत सारी बीमारियों में वर्णन आया है। सबसे खास फोकस इसका आयुर्वेद में चरक ने हृदय रोग के लिए किया है। चरक ने कहा है कि अगर किसी को हृदय रोग है। शालपर्णी का पाउडर बना लें।
दूध के साथ मिलाकर उसका सेवन करें। इसके अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल और शुगर में भी यह उपयोगी है। अगर किसी को जोड़़ों में दर्द होने की समस्या है तो उसे शालपर्णी के चूर्ण को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। अगर किसी को डैंड्रफ की समस्या है तो इसके जड़ को पाउडर बनाकर दही में मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाना चाहिए। अगर किसी को चर्म से संबंधित समस्या है तो उसमें भी शालपर्णी बहुत उपयोगी है। यह कब्ज और बवासीर में उत्पन्न तमाम समस्याओं में उपयोगी है। हर जड़ी बूटी के लाभ हैं तो उसके नुकसान भी होते हैं। इसलिए बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक से राय लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए।
खासतौर से महिलाओं और जो शुगर और हार्ट के मरीज हैं, जिनकी कोई पुरानी दवा चल रही हो, वह आयुर्वेदि चिकित्सक से सलाह लेकर तभी इसका प्रयोग करें। बता दें कि इस धरती पर कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिनका बड़ा औषधीय महत्व है। यह शरीर से बीमारी को दूर करने में औषधि का काम करते हैं। इनमें से एक औषधि है शालीपर्णी। इसका आयुर्वेद में खुद चरक ने वर्णन किया है।

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