एच3एन2 इन्फ्लूएंजा वायरस के मामले देश में लगातार बढ़ रहे हैं। जिसकी वजह से केंद्रीय सरकार ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए यह भी कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है।
एक मार्च को कर्नाटक के रहने वाले हीरे गौडा की H3N2 इन्फ्लूएंजा सबटाइप से मौत हो गई। वह पहले से डायबिटीज और हाइपरटेंशन से जूझ रहे थे। वहीं, हरियाणा में 56 वर्षीय शख्स की मौत भी इस इन्फ्लूएंजा के कारण हुई, वह फेफड़ों के कैंसर से भी पीड़ित थे। इस साल जनवरी से लेकर मार्च के शुरुआती दिनों तक H3N2 के करीब 5 हज़ार से ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए।
सीजनल इन्फ्लूएंजा वायरस चार तरह का होता है- ए, बी, सी और डी। जिनमें से इन्फ्लूएंजा वायरस-ए और बी फ्लू के मौसमी संक्रमण का कारण बनते हैं। यह श्वसन से जुड़ी बीमारी की वजह बनते हैं, जो हर साल होती है। इन्फ्लूएंजा-ए का सबटाइप H1N1, जिसे स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है और H3N2 गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लोगों की उम्र 50 से ऊपर है और जिनकी उम्र 15 से कम है, उनका इस वायरस की चपेट में आना आसान है। साथ ही वायु प्रदूषण संक्रमण को और खतरनाक बना देता है।
सिर्फ इन्फ्लूएंजा टाइप-ए वायरस ही अभी तक महामारी का कारण बने हैं। H3N2 सबटाइप, H2N2 वायरस से ही विकसित हुआ है, जो साल 1968-69 में हांगकांग में महामारी की वजह बना था। उसके बाद से H3N2 इन्फ्लूएंजा में तेजी से बदलाव हुए हैं और कोविड महामारी को छोड़ दिया जाए, तो यह फ्लू के मौसम में डोमिनेंट रहता है।
इन्फ्लूएंजा बी वायरस के दो लीनिएज हैं, बी/यामगाटा या बी/विक्टोरिया वायरस।
कोविड जो पहली बार 2019 में आया, से H3N2 बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह सदियों से रहा है। इसके अलावा कोविड, SARS CoV-2 वायरस की वजह से होता है, तो H3N2 इन्फलूएंजा वायरस का सब-टाइप है।
H3N2 इन्फलूएंजा वायरस के लक्षण कैसे होते हैं?
मौसमी इन्फ्लूएंजा में अचानक बुखार, खांसी (आमतौर पर सूखी), सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, तबियत बुरी तरह खराब होना, गले में खराश और नाक का बहना शामिल है। खांसी गंभीर रूप ले सकती है और दो से ज्यादा हफ्ते तक रह सकती है। वैसे, बुखार, कंपकपी, खांसी और सर्दी कोविड के साथ H3N2 में भी दिखना आम है। हालांकि, सांस लेने में दिक्कत H3N2 की तुलना कोविड संक्रमण में ज्यादा देखने को मिलती है।
H3N2 इन्फलूएंजा वायरस का इलाज क्या है?
जो लोग इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, लेकिन हाई-रिस्क ग्रुप में नहीं आते, उन्हें दवाओं के लिए डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए। साथ ही उन्हें सलाह दी जाती है कि वे घर पर ही रहें, ताकि वायरस का दूसरों में फैलने का जोखिम कम हो सके। इसमें इलाज बुखार जैसे लक्षणों का किया जाता है।
इन्फ्लूएंजा के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध हैं
मौसमी इन्फ्लूएंजा के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जिसे साल में एक बार लगाने की जरूरत होती है। इसे क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन भी कहा जाता है, जो H1N1 और H3N2 सबटाइप के साथ विक्टोरिया और यामगाटा लीनिएज के खिलाफ बचाव करती है।