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एंबुलेंस नेशनल एंबुलेंस कोड के मापदंडों के अनुरूप नहीं | 90 प्रतिशत से अधिक एंबुलेंस में न दक्ष कर्मचारी, पद्मश्री डा़ सुब्रतो दास

90 प्रतिशत से अधिक एंबुलेंसों में न तो दक्ष कर्मचारी हैं

एंबुलेंस नेशनल एंबुलेंस कोड के मापदंडों के अनुरूप नहीं : डा. दास
90 प्रतिशत एंबुलेंस में दक्ष कर्मचारी नहीं
भोपाल (ईएमएस)। ट्रामा केयर के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त पद्मश्री डा. सुब्रतो दास का कहना है कि देशभर में दौड़ रही एंबुलेंस नेशनल एंबुलेंस कोड के मापदंडों के अनुरूप नहीं हैं। 90 प्रतिशत से अधिक एंबुलेंसों में न तो दक्ष कर्मचारी हैं और न ही संसाधन। यह सरकारी आंकड़े हैं। दुर्घटना के एक घंटे के भीतर घायल की सभी जांचें होकर उसे आपरेशन टेबल में होना चाहिए, पर ऐसा बहुत कम हो पाता है। डा. सुब्रतो दास कल यहां केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी (सीएपीटी) में यातायात प्रबंधन पर आयोजित छठे सम्मेलन (सीएपीटी) में सड़क दुर्घटनाएं और ट्रामा केयर के संबंध में अपना प्रस्तुतीकरण दे रहे थे। उन्होंने बताया कि देश में सड़क दुर्घटनाओं में जितनी मौतें होती हैं, उनमें 50 प्रतिशत की मौके पर, 30 प्रतिशत की 48 घंटे में और शेष 20 प्रतिशत की एक सप्ताह के अंदर जान चली जाती है। सीएपीटी के डायरेक्टर अनिल किशोर यादव ने कहा कि कार्यशाला की थीम सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को शून्य करने को लेकर है। यह काम कठिन है, पर असंभव नहीं है। इसमें जो शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इससे सड़क दुर्घटनाएं रोकने और यातायात प्रबंधन को लेकर नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी। यहां आइआइटी खड़गपुर की सहायक प्राध्यापक ऋचा आहुजा ने दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक अपने एक शोध के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि घायल को लोग सबसे पहले नजदीक के छोटे अस्पताल में लेकर जाते हैं, जबकि बेहतर होता है कि ट्रामा सेंटर में ले जाएं भले ही दूर हो। कार्यशाला शुक्रवार को भी होगी। झारखंड के एडीजी (आपरेशन) संजय आनंद लाटकर ने कहा कि जब कोई सड़क दुर्घटना होती है तो पुलिस ज्यादातर मामलों में कारण तेज गति लिखती है, पर हम कभी यह जांच नहीं करते कि सचमुच में गति कितनी थी। उन्होंने गति पता करने के दो रास्ते भी बताए। एक तो यह कि सड़क में अलग-अलग जगह लगे सीसीटीवी कैमरों से समय पता कर चाल निकाल सकते हैं। दूसरा, कैमरे नहीं लगे हों तो ड्राइवर की मोबाइल लोकेशन दो अलग-अलग टावरों की निकालकर गति पता की जा सकती है। उन्होंने कहा, अच्छी सड़कें बनने से तेज गति वाहन के चलते टायर फट रहे हैं, पर पुलिस कभी यह पता नहीं करती कि टायर उतनी गति के अनुरूप थे या नहीं।

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