भोपाल- बाल साहित्य में लोरियां प्रभाती पहेलियां बाल नाटक तथा सामयिक विषयों पर कहानियां लिखी जानी चाहिए। यह बातें प्रो खेम सिंह डहरिया, कुलपति अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय में मानस भवन में आयोजित बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र द्वारा आयोजित बाल कल्याण साहित्य समारोह में कही।
इस अवसर पर सुश्री शीला दाहिमा, अतिरिक्त सचिव , माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कहा की बाल साहित्य बच्चों के मन को पुष्ट करने के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य करते है , वह सराहनीय है । डॉक्टर विकास दवे, निदेशक साहित्य अकादमी ने अपने विचार रखते हुए कहा है
कि बच्चों को संस्कारित करने के लिए दादा दादी और बड़ो के आदर से संबंधित रचनाएं लिखी जानी चाहिए ताकि ब्रधासराम खुलने से रुके ।
श्री हरीश खंडेलवाल ने कहा की बाल साहित्य बच्चों की रुचि के अनुरूप रोचक रचा जाना आवश्यक है ।पुणे से आई डॉक्टर अल्पना पोद्दार विशेष अधिकारी पाठ्यक्रम समिति ने कहा है कि बाल मनोविज्ञान को समझकर तथा पाठ्यक्रम की दृष्टि से बाल साहित्य लिखा जाना जरूरी है
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉक्टर उषा खरे ने स्वागत उद्बोधन दिया और बच्चों ने मोहक प्रस्तुतियां दीं
ये सम्मानित हुए श्री मति नीना सिंह सोलंकी भोपाल , डॉक्टर रामाधार मालविया भोपाल ,डॉक्टर वंदना शर्मा भोपाल , श्री राजकुमार निजात सिरसा, डॉक्टर कृष्णावतार उमराव , विवेकनिधि मथुरा, श्री राजनारायण बोहरे दतिया, श्री मति विमला नगला केकड़ी ,डॉक्टर सत्यवीर मानव जयपुर, श्री संतकुमार बाजपेई संत खीरी, सुश्री ऊषा सोनी भोपाल , श्री धर्मेन्द्र शर्मा भोपाल,।
इस अवसर पर श्रेष्ठ बाल चिकित्सक डॉक्टर मंजू माथुर, श्रेष्ठ बाल पत्रिका बाल किलकारी पटना एवं छात्रा कुमारी भव्या कुमारी भोपाल को भी सम्मानित किया गया ।
इनकी पुस्तके लोकार्पित हुई डॉक्टर वर्षा डोवले की गुनगुनाती पाठशाला , डॉक्टर एस बी गुप्ता की हे प्रभु काव्य पुंज, श्री आई बी पंथ की भारतीय गणतंत्र की मुद्राएं , विनीता राहुरिकर की दूर देश की वासी, डॉक्टर अर्चना वर्मा की टुक्कू राजा चले बाजार , सुनीता शर्मा की नन्हा जादूगर, ऊषा सोनी की स्वाभिमानी चिड़िया ,
संचालन श्री मति शशि बंसल ने किया तथा आभार श्री जलज गुप्ता ने व्यक्त किया। कार्यक्रम ने निदेशक महेश सक्सेना सहित अनेक साहित्यकार एवं बच्चे उपस्थिः रहे।
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