भाजपा को चंदा लेनदेन के आरोपों की जांच | कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा BJP पर ED-CBI के जरिए चंदा वसूली का आरोप
भाजपा को चंदा देने वालों में कुछ के बदले कुछ लेनदेन के आरोपों की जांच के लिए कांग्रेस ने पत्र लिखा
(नई दिल्ली) भाजपा को चंदा देने वालों में कुछ के बदले कुछ लेनदेन के आरोपों की जांच के लिए कांग्रेस ने पत्र लिखा
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को भाजपा को चंदा देने वालों के बीच हुए कुछ के बदले कुछ लेन-देन के आरोपों की जांच के लिए एक पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उसके बाद भाजपा को चंदा देने वालों के बीच हुए लेन-देन के आरोपों की जांच की जाए। 2014 के बाद से राजनेताओं के खिलाफ ईडी के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। 95 फीसदी मामले सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। बतौर वेणुगोपाल, नरेंद्र मोदी अकसर हमारे देश को मदर ऑफ डेमोक्रेसी कहते हैं। क्या स्वायत्त जांच एजेंसियों को कमजोर कर सत्ताधारी दल को चंदा देने के लिए जबरन वसूली और ब्लैकमेल करना ही मदर ऑफ डेमोक्रेसी का हिस्सा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा, इस रिपोर्ट में भाजपा और कई कंपनियों के बीच कुछ के बदले कुछ लेन-देन का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच या छापे के बाद इन कंपनियों ने भाजपा को बड़े पैमाने पर चंदा दिया है। यह एक अजीब तरह का संयोग है। यह रिपोर्ट चुनाव आयोग के डोनेशन से संबंधित डॉक्युमेंट्स और अन्य पुख्ता सबूतों द्वारा प्रमाणित है।
इसके चलते केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और दक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इन तीन में से दो एजेंसियां वित्त मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। पूरा देश जानता है कि केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों को किस रिमोट से और कैसे नियंत्रित किया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी के महासचिव ने लिखा, इसका प्रमाण यह है कि 2014 के बाद से राजनेताओं के खि्लाफ ईडी के मामलों में 4 गुना वृद्धि हुई है। जांच एजेंसियों ने कुछ कंपनियों के खिलाफ या तो जांच की है, या उनकी संपत्ति जब्त कर ली है। बाद में उन्हें भाजपा को चंदा देने के लिए मजबूर किया गया। वित्त वर्ष 2018-19 और 2022-23 के बीच भाजपा को लगभग 335 करोड़ रुपये का चंदा देने वाली कम से कम 30 कंपनियों को उस अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इन फर्मों में से 23 कंपनियों ने, जिन्होंने इस अवधि के दौरान भाजपा को कुल 187.58 करोड़ रुपये दिए थे, 2014 और छापे के वर्ष के बीच कभी भी इस पार्टी को कोई राशि चंदे के रूप में नहीं दी थी। इनमें से कम से कम चार कंपनियों ने केंद्रीय एजेंसियों की विजिट के चार महीने के भीतर कुल 9.05 करोड़ रुपये का दान दिया।
इनमें से कम से कम छह कंपनियां ऐसी हैं, जो पहले से ही भाजपा को चंदा देती थीं, लेकिन छापेमारी के बाद के महीनों में इन सभी ने काफी ज्यादा पैसा चंदे के रूप में दिया। छह अन्य फर्म्स ऐसी हैं, जो पहले हर साल भाजपा को चंदा दिया करते थे, लेकिन जब एक वित्त वर्ष में इन सभी ने चंदा नहीं दिया, तो इन्हें केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। भाजपा के कम से कम तीन चंदादाताओं, जो 30 की सूची में शामिल नहीं हैं, उन पर मोदी सरकार से अनुचित लाभ प्राप्त करने का आरोप लगा था। इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियां के द्वारा दबाव डालकर सत्तारूढ़ दल के लिए चंदे के रूप में कानूनी रूप से जबरदस्ती वसूली की जा रही है।